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"Nadeem khan' Kaavish"
kisi ki laash khaati hai kisi ka KHoon peeti hai
kisi ki laash khaati hai kisi ka KHoon peeti hai | किसी की लाश खाती है किसी का ख़ून पीती है
- "Nadeem khan' Kaavish"
किसी
की
लाश
खाती
है
किसी
का
ख़ून
पीती
है
बहुत
खूॅंखार
है
दुनिया
बहुत
प्यासी
ज़मीं
है
अब
- "Nadeem khan' Kaavish"
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उस
के
क़त्ल
पे
मैं
भी
चुप
था
मेरा
नंबर
अब
आया
मेरे
क़त्ल
पे
आप
भी
चुप
हैं
अगला
नंबर
आपका
है
Nawaz Deobandi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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इक
अव्वल
दर्जे
का
पाक
इक
माहिर
है
मन
तो
तुझ
में
रमता
है
दिल
काफ़िर
फिर
है
अपनी
सोचो
क़त्ल
तुम्हें
करना
भी
है
बन्दे
का
तो
क्या
है
बन्दा
हाज़िर
है
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Vikram Gaur Vairagi
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वो
क़त्ल
कर
के
मुझे
हर
किसी
से
पूछते
हैं
ये
काम
किसने
किया
है,
ये
काम
किस
का
था?
Dagh Dehlvi
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हमीं
को
क़ातिल
कहेगी
दुनिया
हमारा
ही
क़त्ल-ए-आम
होगा
हमीं
कुएँ
खोदते
फिरेंगे
हमीं
पे
पानी
हराम
होगा
अगर
यही
ज़ेहनियत
रही
तो
मुझे
ये
डर
है
कि
इस
सदी
में
न
कोई
अब्दुल
हमीद
होगा
न
कोई
अब्दुल
कलाम
होगा
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Meraj Faizabadi
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ग़ैर
से
खेली
है
होली
यार
ने
डाले
मुझ
पर
दीदा-ए-ख़ूँ-बार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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मच्छरदानी
ऑलआउट
पे
पैसे
क्यूँ
बर्बाद
करूँँ
ख़ून
तो
उसने
चूस
लिया
है
मच्छर
से
अब
डरना
क्यूँँ
SHIV SAFAR
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अश्क़-ओ-ख़ून
घुलते
हैं
तब
दीदा-ए-तर
बनती
है
दास्तान
इश्क़
में
मरने
से
अमर
बनती
है
Jaani Lakhnavi
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वफ़ा
का
ज़ोर
अगर
बाज़ुओं
में
आ
जाए
चराग़
उड़ता
हुआ
जुगनुओं
में
आ
जाए
खिराजे
इश्क़,
कहीं
जा
के
तब
अदा
होगा
हमारा
ख़ून
अगर
आँसुओं
में
आ
जाए
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Hashim Raza Jalalpuri
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अपने
ख़ून
से
इतनी
तो
उम्मीदें
हैं
अपने
बच्चे
भीड़
से
आगे
निकलेंगे
Shakeel Jamali
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मुफ़्लिसी
ऐसी
कि
इक
दिन
पेट
भरने
के
लिए
आँख
फोड़ी
जाएगी
आँसू
निकाले
जाएँगे
क़ब्र
के
आग़ोश
में
ये
दिल
मेरा
जब
आएगा
दिल
की
तह
को
खोदकर
जुगनू
निकाले
जाएँगे
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"Nadeem khan' Kaavish"
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मुसलसल
हादसों
से
आ
रहा
हूँ
किसी
मय्यत
पे
अब
हैरत
नहीं
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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हवा
से
चराग़ों
को
ख़तरा
कहाँ
है
ख़ुदा
जो
न
चाहे
वो
होता
कहाँ
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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मुहब्बत
की
कोई
धुन,
अब
तुझे
सरगम
नहीं
लगती
मैं
तुझको
मैं
नहीं
लगता,
तू
मुझको
हम
नहीं
लगती
बहुत
से
ख़्वाब
अपनी
आँखों
में
दफ़ना
दिए
मैंने
मेरी
आँखें
किसी
शमशान
से
अब
कम
नहीं
लगती
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"Nadeem khan' Kaavish"
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समुंदर
में
भी
वो
रवानी
नहीं
हैं
डूबो
दे
ये
इतना
भी
पानी
नहीं
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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