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"Nadeem khan' Kaavish"
kahii bhi dil na lag paaya
kahii bhi dil na lag paaya | कहीं भी दिल न लग पाया
- "Nadeem khan' Kaavish"
कहीं
भी
दिल
न
लग
पाया
तिरा
जाना
ख़सारा
था
- "Nadeem khan' Kaavish"
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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दोस्त
ने
दिल
को
तोड़
के
नक़्श-ए-वफ़ा
मिटा
दिया
समझे
थे
हम
जिसे
ख़लील
काबा
उसी
ने
ढा
दिया
Arzoo Lakhnavi
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तो
क्या
ये
हो
नहीं
सकता
कि
तुझ
से
दूर
हो
जाऊँँ
मैं
तुझ
को
भूलने
के
वासते
मजबूर
हो
जाऊँ
सुना
है
टूटने
पर
दिल
सभी
कुछ
कर
गुजरते
हैं
मुझे
भी
तोड़
दो
इतना
कि
मैं
मशहूर
हो
जाऊँ
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SHIV SAFAR
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दिल
में
और
दुनिया
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
वक़्त
के
हमेशा
में
अब
नहीं
मिलेंगे
हम
Jaun Elia
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नहीं
ये
फ़िक्र
कोई
रहबर-ए-कामिल
नहीं
मिलता
कोई
दुनिया
में
मानूस-ए-मिज़ाज-ए-दिल
नहीं
मिलता
Asrar Ul Haq Majaz
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तुम्हें
हम
भी
सताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
तुम्हारा
दिल
दुखाने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
हमें
बदनाम
करते
फिर
रहे
हो
अपनी
महफ़िल
में
अगर
हम
सच
बताने
पर
उतर
आएँ
तो
क्या
होगा
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Santosh S Singh
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निभेगी
किस
तरह
दिल
सोचता
है
अजब
लड़की
है
जब
देखो
ख़फ़ा
है
Fuzail Jafri
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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तेरी
आँखों
में
कामिल
डूबकर
ही
मर
गया
कोई
बताओ
इस
तरह
से
भी
ख़ुदा
के
घर
गया
कोई
"Nadeem khan' Kaavish"
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अजब
से
झूठ
कहता
हूँ
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
किसी
ने
सच
नहीं
माना
तो
जब
से
झूठ
कहता
हूँ
वकीलों
से
भी
यारी
हैं
अदब
से
झूठ
कहता
हूँ
किया
था
इश्क़
मैंने
भी
सो
तब
से
झूठ
कहता
हूँ
यक़ीं
मत
कर
तू
ऐ
दुनिया
मैं
रब
से
झूठ
कहता
हूँ
मेरी
ये
बात
सच
है
बस
मैं
सब
से
झूठ
कहता
हूँ
तुझे
सबकुछ
बता
दूँ
क्या
कि
कब
से
झूठ
कहता
हूँ
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"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारा
इक
सहारा
था
उसी
से
बस
गुज़ारा
था
"Nadeem khan' Kaavish"
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बारिशें
सहरा
में
देखी
तो
ये
अंदाज़ा
हुआ
कै़स
की
आँखों
से
भी
आँसू
निकलते
हैं
नदीम
"Nadeem khan' Kaavish"
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हुस्न-ए-यूसुफ़
के
लिए
ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा
की
तड़प
जो
भी
देखे
तो
कहे
ख़्वाब-ए-ज़ुलेख़ा
ही
बना
"Nadeem khan' Kaavish"
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