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"Nadeem khan' Kaavish"
jahaan se rail guzri thii wahin par tujhko dekha tha
jahaan se rail guzri thii wahin par tujhko dekha tha | जहाँ से रेल गुज़री थी वहीं पर तुझको देखा था
- "Nadeem khan' Kaavish"
जहाँ
से
रेल
गुज़री
थी
वहीं
पर
तुझको
देखा
था
मगर
देखा
भी
तो
ऐसे
कि
जैसे
रेल
गुज़री
थी
- "Nadeem khan' Kaavish"
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सुतून-ए-दार
पे
रखते
चलो
सरों
के
चराग़
जहाँ
तलक
ये
सितम
की
सियाह
रात
चले
Majrooh Sultanpuri
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हुआ
है
तुझ
से
बिछड़ने
के
बाद
ये
मालूम
कि
तू
नहीं
था
तेरे
साथ
एक
दुनिया
थी
Ahmad Faraz
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परतव
से
जिस
के
आलम-ए-इम्काँ
बहार
है
वो
नौ-बहार-ए-नाज़
अभी
रहगुज़र
में
है
Ali Sardar Jafri
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बना
कर
हमने
दुनिया
को
जहन्नुम
ख़ुदा
का
काम
आसाँ
कर
दिया
है
Rajesh Reddy
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फ़न्न-ए-ग़ज़ल-आराई
दे
लहजे
को
सच्चाई
दे
दुनिया
है
जंगल
का
सफ़र
लछमन
जैसा
भाई
दे
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Tariq Shaheen
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मेरे
होंटों
पे
अपनी
प्यास
रख
दो
और
फिर
सोचो
कि
इस
के
बा'द
भी
दुनिया
में
कुछ
पाना
ज़रूरी
है
Waseem Barelvi
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जहाँ
इंसानियत
वहशत
के
हाथों
ज़ब्ह
होती
हो
जहाँ
तज़लील
है
जीना
वहाँ
बेहतर
है
मर
जाना
Gulzar Dehlvi
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जहाँ
तक
आके
तुम
वापस
गए
हो
वहाँ
अब
तक
कोई
पहुँचा
नहीं
है
Zubair Ali Tabish
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रात
की
भीगी-भीगी
मिट्टी
से
कुछ
उजाले
उगा
रही
होगी
मेरी
दुनिया
में
करके
अँधियारा
वो
दिवाली
मना
रही
होगी
Tanveer Ghazi
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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वो
जब
भी
याद
आया
तो
मुसलसल
याद
आया
फिर
अचानक
ग़म-ज़दा
करके
मुझे
बेहद
रुलाया
फिर
पुराने
घर
की
सारी
यादों
को
तस्वीर
में
बाँधा
जलाया
दिल
मेरा
और
याद
से
ताला
लगाया
फिर
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"Nadeem khan' Kaavish"
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जिन
आँखों
में
कुछ
सपने
थे
उन
आँखों
में
अब
पानी
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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आज
रौशन
है
सहर
कल
शाम
है
ज़िन्दगी
का
मौत
ही
अंजाम
है
आदमी
ही
आदमी
को
खा
रहा
जानवर
तो
ख़्वाह-मख़ाह
बदनाम
है
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"Nadeem khan' Kaavish"
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ज़रा
सोचो
कि
मेरा
दिल
सभी
का
है,
सियासत
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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मुफ़्लिसी
ऐसी
कि
इक
दिन
पेट
भरने
के
लिए
आँख
फोड़ी
जाएगी
आँसू
निकाले
जाएँगे
क़ब्र
के
आग़ोश
में
ये
दिल
मेरा
जब
आएगा
दिल
की
तह
को
खोदकर
जुगनू
निकाले
जाएँगे
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"Nadeem khan' Kaavish"
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