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"Nadeem khan' Kaavish"
ishaare deta hai vo apni har ik baat ke hi saath
ishaare deta hai vo apni har ik baat ke hi saath | इशारे देता है वो अपनी हर इक बात के ही साथ
- "Nadeem khan' Kaavish"
इशारे
देता
है
वो
अपनी
हर
इक
बात
के
ही
साथ
वो
मेरी
जीत
चाहेगा
तो
अपनी
मात
के
ही
साथ
उधर
मंडप
सजा
है
और
इधर
अर्थी
रखी
है
यार
कोई
बोलो
कि
हम
जाएँगे
उस
बारात
के
ही
साथ
- "Nadeem khan' Kaavish"
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हम
ऐसे
लोग
भी
जाने
कहाँ
से
आते
हैं
ख़ुशी
में
रोते
हैं
जो
ग़म
में
मुस्कुराते
हैं
हमारा
साथ
भला
कब
तलक
निभाते
आप
कभी
कभी
तो
हमीं
ख़ुद
से
ऊब
जाते
हैं
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Mohit Dixit
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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तू
उसके
दिल
में
जगह
चाहता
है
यार
जो
शख़्स
किसी
को
देता
नहीं
अपने
साथ
वाली
जगह
Umair Najmi
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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मशवरा
हम
भी
तो
दे
सकते
थे
पर
तेरा
साथ
दे
रहे
थे
हम
Vishal Singh Tabish
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चलो
न
फिर
से
दरिया
के
नज़दीक
चलें
चलो
न
फिर
से
डुबकी
साथ
लगाएँगे
Atul K Rai
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टेंशन
से
मरेगा
न
कोरोने
से
मरेगा
इक
शख़्स
तेरे
साथ
न
होने
से
मरेगा
Idris Babar
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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बड़ी
मुश्किल
से
नीचे
बैठते
हैं
जो
तेरे
साथ
उठते
बैठते
हैं
Khurram Afaq
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मैं
तो
समझा
था
इक
तू
ही
समझता
है
मुझे
लेकिन
बता
अब
तू
नहीं
समझा
तो
मुझको
कौन
समझेगा
"Nadeem khan' Kaavish"
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हमारा
इक
सहारा
था
उसी
से
बस
गुज़ारा
था
ये
जो
आँखें
हैं
ना
तेरी
यहाँ
इक
घर
हमारा
था
कभी
शा
में
सुहानी
थी
कभी
सूरज
इशारा
था
तू
जब
तक
साथ
था
मेरे
हाँ
हर
ग़म
मुझ
सेे
हारा
था
तेरे
ख़ातिर
जहाँ
डूबा
वो
दरिया
भी
किनारा
था
नज़र
में
हुस्न
लाखों
थे
हमें
पर
वो
ही
प्यारा
था
कहीं
भी
दिल
न
लग
पाया
तेरा
जाना
ख़सारा
था
उसी
ने
फिर
उजाड़ा
यार
जिसे
हमने
सँवारा
था
अलग
ही
नूर
था
इस
में
मेरा
चेहरा
सितारा
था
कहानी
तक
लिखी
तुझपर
ग़ज़ल
तक
में
उतारा
था
वो
शायर
मर
गया
इक
दिन
अली
जिसका
सहारा
था
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"Nadeem khan' Kaavish"
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बहुत
दिन
से
बहुत
ख़ामोश
हूँ
मैं
मगर
अंदर
से
बेहद
चीख़ता
हूँ
"Nadeem khan' Kaavish"
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नई
जान
हमको
मिली
शा'इरी
से
अलग
शान
हमको
मिली
शा'इरी
से
कोई
जानता
ही
नहीं
था
हमें
तो
ये
पहचान
हमको
मिली
शा'इरी
से
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"Nadeem khan' Kaavish"
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समुंदर
में
भी
वो
रवानी
नहीं
हैं
डूबो
दे
ये
इतना
भी
पानी
नहीं
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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