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"Nadeem khan' Kaavish"
ha
ha | हमें जो जिस नज़र से देखता है वैसे दिखते हैं
- "Nadeem khan' Kaavish"
हमें
जो
जिस
नज़र
से
देखता
है
वैसे
दिखते
हैं
है
ख़ुद
पर
नाज़
हमको
यार
चाहे
जैसे
दिखते
हैं
अगर
शीशा
नहीं
होता
तो
ख़ुद
से
बेख़बर
रहते
पता
चलता
नहीं
यारों
कि
अब
हम
कैसे
दिखते
हैं
- "Nadeem khan' Kaavish"
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ग़रज़
कि
काट
दिए
ज़िंदगी
के
दिन
ऐ
दोस्त
वो
तेरी
याद
में
हों
या
तुझे
भुलाने
में
Firaq Gorakhpuri
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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फ़िराक़-ए-यार
ने
बेचैन
मुझ
को
रात
भर
रक्खा
कभी
तकिया
इधर
रक्खा
कभी
तकिया
उधर
रक्खा
Ameer Minai
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ख़ुद
को
शीशा
कर
लिया
है
यार
मैंने
अब
तो
तेरा
देखना
बनता
है
मुझ
को
Neeraj Neer
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इस
से
पहले
कि
बे-वफ़ा
हो
जाएँ
क्यूँँ
न
ऐ
दोस्त
हम
जुदा
हो
जाएँ
Ahmad Faraz
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यार
आसान
होती
नहीं
यह
कला
मौन
रहना
बड़ी
ही
चुनौती
रही
Aniket sagar
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अपने
में'यार
से
नीचे
तो
मैं
आने
से
रहा
शे'र
भूखा
हूँ
मगर
घास
तो
खाने
से
रहा
Mehshar Afridi
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मकाँ
तो
है
नहीं
जो
खींच
दें
दीवार
इस
दिल
में
कोई
दूजा
नहीं
रह
पाएगा
अब
यार
इस
दिल
में
जहाँ
भर
में
लुटाते
फिर
रहे
है
कम
नहीं
होता
तुम्हारे
वास्ते
इतना
रखा
था
प्यार
इस
दिल
में
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Bhaskar Shukla
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लंबा
हिज्र
गुज़ारा
तब
ये
मिलने
के
पल
चार
मिले
जैसे
एक
बड़े
हफ़्ते
में
छोटा
सा
इतवार
मिले
माना
थोड़ा
मुश्किल
है
पर
रोज़
दु'आ
में
माँगा
है
जो
मुझ
सेे
भी
ज़्यादा
चाहे
तुझको
ऐसा
यार
मिले
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Bhaskar Shukla
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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ज़रा
सोचो
कि
मेरा
दिल
सभी
का
है,
सियासत
है
"Nadeem khan' Kaavish"
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यार
तेरी
चीज़
सब
हम
ने
हटा
दी
इस
नज़र
से
फेंक
आया
वो
घड़ी
भी
जो
कि
लाई
थी
शहरस
"Nadeem khan' Kaavish"
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तेरी
आँखें
शराबी
हैं
या
फिर
मुझ
में
ख़राबी
है
हरा
पहने
या
फिर
काला
तू
सब
में
ही
गुलाबी
है
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"Nadeem khan' Kaavish"
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नज़र
में
हुस्न
लाखों
थे
हमें
पर
वो
ही
प्यारा
था
"Nadeem khan' Kaavish"
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ख़ुद
ही
अब
अपनी
कहानी
लिख
रहे
हैं
उस
में
अपने
आँसू
पानी
लिख
रहे
हैं
इसने
तेरे
जैसी
ही
बर्बादी
दी
है
यार
तुझको
हम
जवानी
लिख
रहे
हैं
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"Nadeem khan' Kaavish"
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