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"Nadeem khan' Kaavish"
nazar men husn laakhon the
nazar men husn laakhon the | नज़र में हुस्न लाखों थे
- "Nadeem khan' Kaavish"
नज़र
में
हुस्न
लाखों
थे
हमें
पर
वो
ही
प्यारा
था
- "Nadeem khan' Kaavish"
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अब
ज़रूरी
तो
नहीं
है
कि
वो
सब
कुछ
कह
दे
दिल
में
जो
कुछ
भी
हो
आँखों
से
नज़र
आता
है
मैं
उस
सेे
सिर्फ़
ये
कहता
हूँ
कि
घर
जाना
है
और
वो
मारने
मरने
पे
उतर
आता
है
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Tehzeeb Hafi
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ये
भी
मुमकिन
है
मियाँ
आँख
भिगोने
लग
जाऊँ
वो
कहे
कैसे
हो
तुम
और
मैं
रोने
लग
जाऊँ
ऐ
मेरी
आँख
में
ठहराए
हुए
वस्ल
के
ख़्वाब
मैं
तवातुर
से
तेरे
साथ
न
सोने
लग
जाऊँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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आँसू
हमारे
गिर
गए
उन
की
निगाह
से
इन
मोतियों
की
अब
कोई
क़ीमत
नहीं
रही
Jaleel Manikpuri
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भीगी
पलकें
देख
कर
तू
क्यूँँ
रुका
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
तो
मेरी
आँख
में
कुछ
आ
गया
है
ख़ुश
हूँ
मैं
वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आकर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
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Zubair Ali Tabish
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सारी
दुनिया
ने
तो
नफ़रत
से
पुकारा
मुझको
माँ
समझती
है
मगर
आँख
का
तारा
मुझको
Muneer shehryaar
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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दूर
इक
सितारा
है
और
वो
हमारा
है
आँख
तक
नहीं
लगती
कोई
इतना
प्यारा
है
छू
के
देखना
उसको
क्या
अजब
नज़ारा
है
तीर
आते
रहते
थे
फूल
किसने
मारा
है
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Kafeel Rana
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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सुना
है
लोग
उसे
आँख
भर
के
देखते
हैं
सो
उस
के
शहर
में
कुछ
दिन
ठहर
के
देखते
हैं
Ahmad Faraz
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सुब्ह-ए-मग़रूर
को
वो
शाम
भी
कर
देता
है
शोहरतें
छीन
के
गुमनाम
भी
कर
देता
है
वक़्त
से
आँख
मिलाने
की
हिमाकत
न
करो
वक़्त
इंसान
को
नीलाम
भी
कर
देता
है
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Nadeem Farrukh
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कोशिशें
करती
रहीं,
आई
नहीं
उन्नीस
में
अब
जवानी
खुल
के
आई
हैं
हमारी
बीस
में
जा
रहे
हैं
रेगुलर
जो
लेने
विस्की
ठेके
पर
चाहिए
इनको
कमी
स्कूलों
की
हर
फ़ीस
में
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"Nadeem khan' Kaavish"
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कहीं
भी
दिल
न
लग
पाया
तिरा
जाना
ख़सारा
था
"Nadeem khan' Kaavish"
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आज
रौशन
है
सहर
कल
शाम
है
ज़िन्दगी
का
मौत
ही
अंजाम
है
आदमी
ही
आदमी
को
खा
रहा
जानवर
तो
ख़्वाह-मख़ाह
बदनाम
है
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"Nadeem khan' Kaavish"
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हमीं
थे
जो
क़िस्से
में
लाए
तुझे
हमीं
को
ये
क़िस्सा
सुनाया
गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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सुनहरी
धूप,
ठंडी
हवाएँ
और
ये
सफ़र
न
जाने
कब
तेरा
गांँव
गुज़रा,
कुछ
पता
नहीं
"Nadeem khan' Kaavish"
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