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"Nadeem khan' Kaavish"
duniya ki tabdeeli men bachpan se bacche kat ga.e
duniya ki tabdeeli men bachpan se bacche kat ga.e | दुनिया की तब्दीली में, बचपन से बच्चे कट गए
- "Nadeem khan' Kaavish"
दुनिया
की
तब्दीली
में,
बचपन
से
बच्चे
कट
गए
नाव
सड़के
खा
गई,
पेड़ों
से
झूले
कट
गए
ख़्वाब
की
ख़ातिर
किराएदार
बन
बैठे
हैं
हम
घर
बनाने
के
लिए
हम
लड़के
घर
से
कट
गए
- "Nadeem khan' Kaavish"
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ये
ज़रूरी
है
कि
आँखों
का
भरम
क़ाएम
रहे
नींद
रक्खो
या
न
रक्खो
ख़्वाब
मेयारी
रखो
Rahat Indori
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कि
तुमको
देखने
के
बाद
यारा
तुम्हारे
ख़्वाब
सब
देखा
करेंगे
Kaviraj " Madhukar"
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हर
एक
शख़्स
यहाँ
महव-ए-ख़्वाब
लगता
है
किसी
ने
हम
को
जगाया
नहीं
बहुत
दिन
से
Azhar Iqbal
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ख़मोशी
मेरी
मअनी-ख़ेज़
थी
ऐ
आरज़ू
कितनी
कि
जिस
ने
जैसा
चाहा
वैसा
अफ़्साना
बना
डाला
Arzoo Lakhnavi
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भरे
हुए
जाम
पर
सुराही
का
सर
झुका
तो
बुरा
लगेगा
जिसे
तेरी
आरज़ू
नहीं
तू
उसे
मिला
तो
बुरा
लगेगा
ये
आख़िरी
कंपकंपाता
जुमला
कि
इस
तअ'ल्लुक़
को
ख़त्म
कर
दो
बड़े
जतन
से
कहा
है
उस
ने
नहीं
किया
तो
बुरा
लगेगा
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Zubair Ali Tabish
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जब
भी
माँगूँ
तेरी
ख़ुशी
माँगूँ
और
दुआएँ
ख़ुदा
तलक
जाएँ
ख़्वाब
आएँ
तो
नींद
यूँँ
महके
आँख
से
ख़ुशबुएँ
छलक
जाएँ
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Ritesh Rajwada
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बेटियाँ
बाप
की
आँखों
में
छुपे
ख़्वाब
को
पहचानती
हैं
और
कोई
दूसरा
इस
ख़्वाब
को
पढ़
ले
तो
बुरा
मानती
हैं
Iftikhar Arif
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रो
रही
हूँ
कि
तुम
दिख
न
पाए
कहीं
हाए
ये
ख़्वाब
सिंदूर
है
माँग
में
Neeraj Neer
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'असद'
ये
शर्त
नहीं
है
कोई
मुहब्बत
में
कि
जिस
सेे
प्यार
करो
उसकी
आरज़ू
भी
करो
Subhan Asad
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ऐ
शौक़-ए-नज़ारा
क्या
कहिए
नज़रों
में
कोई
सूरत
ही
नहीं
ऐ
ज़ौक़-ए-तसव्वुर
क्या
कीजे
हम
सूरत-ए-जानाँ
भूल
गए
Asrar Ul Haq Majaz
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सभी
सीरत,
सभी
सूरत,
सभी
एहसास
में
हो
तुम
मेरी
आँखों
की
इक
ही
आस
हैं,
उस
आस
में
हो
तुम
मेरे
ख़्वाबों
में
आकर
ख़ुद
को
तुम
अच्छा
बताते
हो
चलो
मैं
मान
लेता
हूँ
ख़ुदा
के
ख़ास
में
हो
तुम
परेशानी
में
जैसे
हाथ
मेरे
सर
पे
होता
है
मुझे
महसूस
होता
है
कि
जैसे
पास
में
हो
तुम
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"Nadeem khan' Kaavish"
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कहीं
और
क्यूँँ
जाऊँ
मैं
तेरा
दर
छोड़कर
बता
कौन
जाता
है
अपना
ही
घर
छोड़कर
"Nadeem khan' Kaavish"
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सभी
को
याद
करते
हैं,
वो
जिस-जिस
ने
दिया
धोखा
मगर
उनके
दिलों
से
भी
शिकायत
ही
न
हो
पाई
"Nadeem khan' Kaavish"
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इसी
उम्मीद
पे
ज़िंदा
रहे
हम
कि
तुम
सेे
फिर
मिलेंगे
आसमाँ
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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मुद्दत
के
बाद
घर
की
तरफ़
लौटना
हुआ
देखा
तो
जाना,
घर
से
मेरे
घर
निकल
गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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