rahne ko sadaa dehr men aata nahin koi | रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई

  - Kaifi Azmi
रहनेकोसदादहरमेंआतानहींकोई
तुमजैसेगएऐसेभीजातानहींकोई
डरताहूँकहींख़ुश्कहोजाएसमुंदर
राखअपनीकभीआपबहातानहींकोई
इकबारतोख़ुदमौतभीघबरागईहोगी
यूँँंमौतकोसीनेसेलगातानहींकोई
मानाकिउजालोंनेतुम्हेंदाग़दिएथे
बे-रातढलेशमाबुझातानहींकोई
साक़ीसेगिलाथातुम्हेंमय-ख़ानेसेशिकवा
अबज़हरसभीप्यासबुझातानहींकोई
हरसुब्हहिलादेताथाज़ंजीरज़माना
क्यूँँंआजदिवानेकोजगातानहींकोई
अर्थीतोउठालेतेहैंसबअश्कबहाके
नाज़-ए-दिल-ए-बेताबउठातानहींकोई
  - Kaifi Azmi
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