chaand ubhara na mire jism se saaya niklaa | चाँद उभरा न मिरे जिस्म से साया निकला

  - Kaif Ansari
चाँदउभरामिरेजिस्मसेसायानिकला
शाम-ए-ग़मआईतोमैंघरसेअकेलानिकला
आजआयाहैदरीचेपेहवाकाझोंका
आजकोईतोमुझेदेखनेवालानिकला
येअलगबातकिखुलनेलगेपलकोंकेवरक़
नोक-ए-लबसेकभीहर्फ़-ए-तमन्नानिकला
होगएऔरदर-ओ-बामनज़रसेओझल
दर-हक़ीक़तयेउजालाभीअँधेरानिकला
कोईआवाज़तोजातीकहींसेवापस
येकुआँघरकातोइतनाभीगहरानिकला
लौटजाअबमिरीआँखोंमेंनहींहैंआँसू
तूसमुंदरजिसेसमझाथावोसहरानिकला
  - Kaif Ansari
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