kaashif ghazal tumhaari padhi aaj raat men | काशिफ़' ग़ज़ल तुम्हारी पढ़ी आज रात में

  - kaashif shakiil
काशिफ़'ग़ज़लतुम्हारीपढ़ीआजरातमें
मानाजीतपाऊँगीमैंतुमसेबातमें
'काशिफ़'सनम-परस्तीनहींदीनियातमें
येतुमकहाँसेपड़गएलात-ओ-मनातमें
'काशिफ़'किताब-ए-इश्क़काइजरायूँँकरो
यूँँवक़्तगँवायाकरोवाहियातमें
'काशिफ़'हमारेप्यारमेंक्याक्यानहींहुआ
लेकिनतुम्हारीफ़त्हरहीमेरीमातमें
'काशिफ़'तुम्हाराइश्क़हीमेराजहैमिरी
सबआसमानठहरेतुम्हारीहीज़ातमें
'काशिफ़'यक़ीनहैमुझेईमानहैमिरा
तुमसामिलसकेगामुझेकाएनातमें
  - kaashif shakiil
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