nabood o bood ke manzar banata rehta hooñ | नबूद ओ बूद के मंज़र बनाता रहता हूँ

  - Kaami Shah
नबूदबूदकेमंज़रबनातारहताहूँ
मैंज़र्दआगमेंख़ुदकोजलातारहताहूँ
तिरेजमालकासदक़ायेआतिश-ए-रौशन
चराग़आब-ए-रवाँपरबहातारहताहूँ
दुआएँउसकेलिएहैंसदाएँउसकेलिए
मैंजिसकीराहमेंबादलबिछातारहताहूँ
उदासधुनहैकोईउनग़ज़ालआँखोंमें
दिएकेसाथजिसेगुनगुनातारहताहूँ
अजीबसुस्त-रवीसेयेदिनगुज़रतेहैं
मैंआसमानपेशा
मेंबनातारहताहूँ
मैंउड़तारहताहूँनीलेसमुंदरोंमेंकहीं
सोतितलियोंकेलिएख़्वाबलातारहताहूँ
येमुझमेंफैलरहाहैजोइज़्तिराब-ए-शदीद
तोफिरयेतयहैउसेयादआतारहताहूँ
  - Kaami Shah
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