agar main sach kahooñ to sabr hi ki aazmaish hai | अगर मैं सच कहूँ तो सब्र ही की आज़माइश है

  - Kaami Shah
अगरमैंसचकहूँतोसब्रहीकीआज़माइशहै
येमिट्टीइम्तिहाँप्यारेयेपानीआज़माइशहै
निकलकरख़ुदसेबाहरभागनेसेख़ुदमेंआनेतक
फ़रारआख़िरहैयेकैसायेकैसीआज़माइशहै
तलाश-ए-ज़ातमेंहमकोकिसीबाज़ार-ए-हस्तीमें
तिरामिलनातिराखोनाअलगहीआज़माइशहै
नबूदबूदकेफैलेहुएइसकार-ख़ानेमें
उछलतीकूदतीदुनियाहमारीआज़माइशहै
मिरेदिलकेदरीचेसेउचककरझाँकतीबाहर
गुलाबीएड़ियोंवालीअनोखीआज़माइशहै
येतूजोख़ुदपेनाफ़िज़होगयाहैशामकीसूरत
तोजानीशामकीकबहैयेतेरीआज़माइशहै
दिएकेऔरहवाओंकेमरासिमखुलनहींपाते
नहींखुलताकिइनमेंसेयेकिसकीआज़माइशहै
  - Kaami Shah
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