ham ishq-e-majaazi par ilzaam ye dharte hain | हम इश्क़-ए-मजाज़ी पर इल्ज़ाम ये धरते हैं

  - 'June' Sahab Barelvi
हमइश्क़-ए-मजाज़ीपरइल्ज़ामयेधरतेहैं
येइश्क़होयारोंइसइश्क़सेडरतेहैं
पहलेतोयेकहतेथेहरहालमेंरहलेंगे
अबदेखकेहालोंकोबातोंसेमुकरतेहैं
क्याख़ाकगुज़ारेंगेवोउम्रमुहब्बतमें
इकउम्रकाकहकरजोपलभरहीठहरतेहैं
आतेहैंजोइसदिलमेंइकबातसेहीयारों
इकबातसेहीगोयादिलसेवोउतरतेहैं
मायूबमुझेकहकरवाबस्ताहैऔरोंसे
ऊपरसेसितमदेखोसजतेहैंसॅंवरतेहैं
तज़लीलहुएइतनेजाकरकेखुलीछतपर
ख़ुदअपनेपरोंकोहमदाँतोंसेकतरतेहैं
  - 'June' Sahab Barelvi
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