हर्फ़-ए-आख़िरयहीकहूॅंगामैं
जीतसकतेथेजंगलफ़्ज़ोंसे
मैंतोमहव-ए-ख़याल-ए-यारहूॅंअब
मा'ज़रतचाहताहूॅंलोगोंसे
इतनेलाहक़हैंख़ैर-ख़्वाहमिरे
दिलपरेशाँहैख़ैर-ख़्वाहोंसे
भारी-भरकममैंलफ़्ज़रखताहूॅं
जीतनाहैमुझेअदीबोंसे
सरपेयादोंकाइकअसासाहै
भरगएपाँवमेरेछालोंसे
इज़्ज़त-ए-नफ़्सताकपररखकर
मैंगुज़रताहूॅंउसकीगलियोंसे
देकेज़ख़्म-ए-दिल-ओ-नमकयारों
हालवोपूछताहैअपनोंसे
हाल-ए-दिलआठ'जून'सेअबतक
मुब्तलाहैशराब-गाहोंसे