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Jitendra "jeet"
un aankhoñ pe she'r kahe kaise koi
un aankhoñ pe she'r kahe kaise koi | उन आँखों पे शे'र कहे कैसे कोई
- Jitendra "jeet"
उन
आँखों
पे
शे'र
कहे
कैसे
कोई
जिन
आँखों
से
बहता
दरिया
देखा
है
- Jitendra "jeet"
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काश
जन्नत
हमें
मिले
ऐसी
हर
तरफ़
आशिक़ाना
मौसम
हो
Amaan Pathan
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पत्थर
दिल
के
आँसू
ऐसे
बहते
हैं
जैसे
इक
पर्वत
से
नदी
निकलती
है
Shobhit Dixit
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मुतअस्सिर
हैं
यहाँ
सब
लोग
जाने
क्या
समझते
हैं
नहीं
जो
यार
शबनम
भी
उसे
दरिया
समझते
हैं
हक़ीक़त
सारी
तेरी
मैं
बता
तो
दूँ
सर-ए-महफ़िल
मगर
ये
लोग
सारे
जो
तुझे
अच्छा
समझते
हैं
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Nirvesh Navodayan
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मंज़र
बना
हुआ
हूँ
नज़ारे
के
साथ
मैं
कितनी
नज़र
मिलाऊँ
सितारे
के
साथ
मैं
दरिया
से
एक
घूँट
उठाने
के
वास्ते
भागा
हूँ
कितनी
दूर
किनारे
के
साथ
मैं
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Khalid Sajjad
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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मुझ
पर
निगाह-ए-नाज़
का
जब
जादू
चल
गया
मैं
रफ़्ता
रफ़्ता
क़ैस
की
सोहबत
में
ढल
गया
ज़ुल्फें
उन्होंने
खोल
के
बिखराई
थी
शजर
फिर
देखते
ही
देखते
मौसम
बदल
गया
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Shajar Abbas
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सर्दी
और
गर्मी
के
उज़्र
नहीं
चलते
मौसम
देख
के
साहब
इश्क़
नहीं
होता
Moin Shadab
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बीच
भँवर
से
कश्ती
कैसे
बच
निकली
बहुत
दिनों
तक
दरिया
भी
हैरान
रहा
Madan Mohan Danish
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एक
दरिया
है
यहाँ
पर
दूर
तक
फैला
हुआ
आज
अपने
बाजुओं
को
देख
पतवारें
न
देख
Dushyant Kumar
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मिरी
ज़बान
के
मौसम
बदलते
रहते
हैं
मैं
आदमी
हूँ
मिरा
ए'तिबार
मत
करना
Asim Wasti
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गीत
मुक्तक
सभी
वो
भुलाए
गए
होंठों
तक
आए
पर
जो
न
गाए
गए
तब
से
आँखों
का
नींदों
से
नाता
नहीं
जबसे
गोदी
में
सर
रख
सुलाए
गए
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Jitendra "jeet"
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ये
किसने
बोला
है
मेरे
लहजे
में
तुम
भी
बोलो
क्या
जाता
है
कहने
में
मैंने
देखा
है
सागर
को
भी
रोते
वो
भी
तो
रहता
है
हर
पल
सद
में
में
रातें,
यादें
,रस्सी
,पंखा
,तन्हाई
अब
क्या
क्या
लगता
है
यारों
मरने
में
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Jitendra "jeet"
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रोज़
कहता
था
जो
ख़ुद-कुशी
जुर्म
है
लाश
पँखे
से
उसकी
उतारी
गई
Jitendra "jeet"
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इक
लड़की
मेरे
ख़्वाबों
में
आया
करती
थी
मुर्शिद
इक
लड़की
के
ख़्वाब
हुआ
करते
थे
हम
Jitendra "jeet"
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मैं
तो
माँ
के
क़दमों
में
हूँ
मुझको
जन्नत
से
क्या
लेना
Jitendra "jeet"
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