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Jitendra "jeet"
saath jin ke safar pe jo nikle ho tum
saath jin ke safar pe jo nikle ho tum | साथ जिन के सफ़र पे जो निकले हो तुम
- Jitendra "jeet"
साथ
जिन
के
सफ़र
पे
जो
निकले
हो
तुम
कोई
मेरी
तरह
अब
रुकेगा
नहीं
- Jitendra "jeet"
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मुसाफ़िर
हैं
हम
भी
मुसाफ़िर
हो
तुम
भी
किसी
मोड़
पर
फिर
मुलाक़ात
होगी
Bashir Badr
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तुझ
तक
आने
का
सफ़र
इतना
भी
आसाँ
तो
न
था
तूने
फेरी
है
नज़र
हम
सेे
जिस
आसानी
से
Mohit Dixit
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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बाग़-ए-बहिश्त
से
मुझे
हुक्म-ए-सफ़र
दिया
था
क्यूँँ
कार-ए-जहाँ
दराज़
है
अब
मिरा
इंतिज़ार
कर
Allama Iqbal
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ये
आँसू
ढूँडता
है
तेरा
दामन
मुसाफ़िर
अपनी
मंज़िल
जानता
है
Asad Bhopali
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जिस
दौर
से
माज़ी
मिरा
गुज़रा
है
ना
उस
दौर
से
अच्छा
है
ये
तन्हा
सफ़र
Bhoomi Srivastava
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छोटी
छोटी
बातें
करके,
बड़े
कहाँ
हो
जाओगे
पतली
गलियों
से
निकलो
तो
खुली
सड़क
पर
आओगे
Waseem Barelvi
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सफ़र
के
बाद
भी
ज़ौक़-ए-सफ़र
न
रह
जाए
ख़याल
ओ
ख़्वाब
में
अब
के
भी
घर
न
रह
जाए
Abhishek shukla
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किसी
को
घर
से
निकलते
ही
मिल
गई
मंज़िल
कोई
हमारी
तरह
उम्र
भर
सफ़र
में
रहा
Ahmad Faraz
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सफ़र
में
आख़िरी
पत्थर
के
बाद
आएगा
मज़ा
तो
यार
दिसंबर
के
बाद
आएगा
Rahat Indori
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इक
रोज़
दोस्त
देंगे
ये
माँ
बाप
को
ख़बर
भेजा
जो
शहर
आपने
लड़का
नहीं
रहा
Jitendra "jeet"
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इक़-तरफ़ा
ये
रिश्ते
आख़िर
कब
तक
हर
ग़म
मेरे
हिस्से
आख़िर
कब
तक
चीख
सुनाई
देगी
तुमको
इक
दिन
और
बनोगे
बहरे
आख़िर
कब
तक
अब
जाना
है
सो
तुम
जा
सकते
हो
लाएँगे
हम
पहरे
आख़िर
कब
तक
अपने
हाल
पे
ख़ुद
ही
हँसना
आया
उसकी
याद
में
रोते
आख़िर
कब
तक
दिल
की
बातें
दीवारों
से
कह
दी
ख़ुद
में
घुटते
रहते
आख़िर
कब
तक
लड़की
मुझ
सेे
इश्क़
जता
अब
तू
भी
घुटने
के
बल
लड़के
आख़िर
कब
तक
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Jitendra "jeet"
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ये
ख़ुदा
तू
तो
ये
जानता
है
कितने
तरसे
हैं
इक
शख़्स
को
हम
Jitendra "jeet"
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इक
ज़रा
सी
बात
पे
झगड़ा
हुआ
छोड़
कर
के
वो
गया
रोता
हुआ
ये
उदासी
अब
मुझे
खा
जाएगी
रो
पड़ा
इक
शख़्स
ये
कहता
हुआ
रौंदा
जाऊँगा
किसी
पाँव
तले
फूल
हूँ
मैं
डाल
से
टूटा
हुआ
आँख
में
आँसू
मेरी
भर
आए
हैं
याद
आया
वक़्त
जो
गुज़रा
हुआ
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Jitendra "jeet"
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तीरगी
में
कटी
उम्र
बस
इसलिए
की़मतें
थी
नहीं
रौशनी
के
लिए
दोस्त
बनकर
गले
से
लगे
थे
कभी
आज
मशहूर
हैं
दुश्मनी
के
लिए
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Jitendra "jeet"
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