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Jitendra "jeet"
teergii men kati umr bas is
teergii men kati umr bas is | तीरगी में कटी उम्र बस इसलिए
- Jitendra "jeet"
तीरगी
में
कटी
उम्र
बस
इसलिए
की़मतें
थी
नहीं
रौशनी
के
लिए
दोस्त
बनकर
गले
से
लगे
थे
कभी
आज
मशहूर
हैं
दुश्मनी
के
लिए
- Jitendra "jeet"
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नाज़
क्या
इस
पे
जो
बदला
है
ज़माने
ने
तुम्हें
मर्द
हैं
वो
जो
ज़माने
को
बदल
देते
हैं
Akbar Allahabadi
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ज़रा
मौसम
तो
बदला
है
मगर
पेड़ों
की
शाख़ों
पर
नए
पत्तों
के
आने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
बहुत
से
ज़र्द
चेहरों
पर
ग़ुबार-ए-ग़म
है
कम
बे-शक
पर
उन
को
मुस्कुराने
में
अभी
कुछ
दिन
लगेंगे
Javed Akhtar
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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दश्त
छोड़े
हुए
अब
तो
अर्सा
हुआ
मैं
हूँ
मजनूँ
मगर
नाम
बदला
हुआ
मुझको
औरत
के
दुख
भी
पता
हैं
कि
मैं
एक
लड़का
हूँ
बेवा
का
पाला
हुआ
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Rishabh Sharma
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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दुश्मनी
जम
कर
करो
लेकिन
ये
गुंजाइश
रहे
जब
कभी
हम
दोस्त
हो
जाएँ
तो
शर्मिंदा
न
हों
Bashir Badr
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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आप
बच्चों
का
दिल
नहीं
तोड़ें
भाई
ये
दुश्मनी
हमारी
है
Vishnu virat
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इन
दिनों
दोस्त
मेरे
सारे
ही
रूठे
हुए
हैं
मेरे
दुश्मन
यही
मौक़ा
है
हरा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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पहले
तो
याद
का
मसअला
है
ज़ख़्म
तो
बाद
का
मसअला
है
शायरों
पर
ग़ज़ल
कह
रहे
हो
शा'इरी
दाद
का
मसअला
है
हम
तेरे
जाल
में
फँस
गए
हैं
आगे
सय्याद
का
मसअला
है
पहले
तुम
हारना
सीख
लेते
जीत
तो
बाद
का
मसअला
है
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Jitendra "jeet"
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कुछ
ग़म
लटके
थे
खूँटी
से
कुछ
याद
मिली
अलमारी
से
Jitendra "jeet"
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बात
क्या
थी
जो
मुझ
सेे
ख़फ़ा
हो
गए
तुम
तो
मिलने
से
पहले
जुदा
हो
गए
मेरे
जीवन
में
आए
बहारों
से
तुम
फिर
अचानक
से
तुम
क्यूँ
फ़ज़ा
हो
गए
उम्र
भर
जो
उतारे
से
उतरे
नहीं
मेरी
आँखों
का
तुम
वो
नशा
हो
गए
एक
पल
में
बने
ख़ास
तुम
थे
मगर
एक
पल
में
ही
तुम
आम
सा
हो
गए
बात
दिल
पर
लगी
क्या
बताओ
मुझे
तुम
समझ
से
परे
की
अना
हो
गए
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Jitendra "jeet"
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मुझ
सेे
अक्सर
जो
बहने
की
कहता
रहता
है
इन
आँखों
के
नीचे
कोई
दरिया
रहता
है
तुमने
कैसे
सोच
लिया
महफ़िल
में
तन्हा
हूँ
साथ
हमारे
यादों
का
इक
पहरा
रहता
है
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Jitendra "jeet"
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चुराकर
मिरा
दिल
तुम्हें
क्या
मिलेगा
बची
पास
कोई
निशानी
नहीं
है
Jitendra "jeet"
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