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Jitendra "jeet"
churakar mira dil tumhein kya milega
churakar mira dil tumhein kya milega | चुराकर मिरा दिल तुम्हें क्या मिलेगा
- Jitendra "jeet"
चुराकर
मिरा
दिल
तुम्हें
क्या
मिलेगा
बची
पास
कोई
निशानी
नहीं
है
- Jitendra "jeet"
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उम्र
गुज़री
दवाएँ
करते
'मीर'
दर्द-ए-दिल
का
हुआ
न
चारा
हनूज़
Meer Taqi Meer
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किस
तरह
'अमानत'
न
रहूँ
ग़म
से
मैं
दिल-गीर
आँखों
में
फिरा
करती
है
उस्ताद
की
सूरत
Amanat Lakhnavi
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तिरंगा
दिल
में
है
लबों
पे
हिंदुस्तान
रखता
हूँ
सिपाही
हूँ
हथेली
पे
मैं
अपनी
जान
रखता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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जितने
भी
हैं
ज़ख़्म
तुम्हारे
सिल
देगी
होटल
में
खाने
का
आधा
बिल
देगी
सीधे
मुँह
जो
बात
नहीं
करती
है
जो
तुमको
लगता
है
वो
लड़की
दिल
देगी
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Shadab Asghar
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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रातें
किसी
याद
में
कटती
हैं
और
दिन
दफ़्तर
खा
जाता
है
दिल
जीने
पर
माएल
होता
है
तो
मौत
का
डर
खा
जाता
है
सच
पूछो
तो
'तहज़ीब
हाफ़ी'
मैं
ऐसे
दोस्त
से
आज़िज़
हूँ
मिलता
है
तो
बात
नहीं
करता
और
फोन
पे
सर
खा
जाता
है
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Tehzeeb Hafi
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हर
धड़कते
पत्थर
को
लोग
दिल
समझते
हैं
'उम्रें
बीत
जाती
हैं
दिल
को
दिल
बनाने
में
Bashir Badr
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कैसा
दिल
और
इस
के
क्या
ग़म
जी
यूँँ
ही
बातें
बनाते
हैं
हम
जी
Jaun Elia
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ये
कहते
हो
तिरे
जाने
से
दिल
को
चैन
आएगा
तो
जाता
हूँ,
ख़ुदा
हाफ़िज़!
मगर
तुम
झूठ
कहते
हो
Zubair Ali Tabish
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कुछ
बात
लिखी
थी
मीटर
में
कुछ
शे'र
कहे
थे
सच्चे
से
Jitendra "jeet"
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यूँँ
उलझते
गए
इश्क़
में
हम
तेरे
वक़्त
मिलता
नहीं
ख़ुद-कुशी
के
लिए
Jitendra "jeet"
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सबको
जीने
का
यूँँ
ढब
नहीं
आएगा
आना
जब
चाहिए
तब
नहीं
आएगा
व्यर्थ
ही
जाएगा
राह
तकना
तेरा
जो
गया
सो
गया
अब
नहीं
आएगा
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Jitendra "jeet"
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आपका
इक
इसारा
बहुत
है
दरिया
का
इक
किनारा
बहुत
है
आसमाँ
के
सभी
तारे
उसके
चाँद
हो
बस
हमारा
बहुत
है
सोचता
हूँ
उसे
छोड़
तो
दूँ
यार
वो
शख़्स
प्यारा
बहुत
है
देखने
को
बहुत
कुछ
यहाँ
पर
यार
का
इकऑ
नजारा
बहुत
है
ख़ामुशी
ये
बयाँ
कर
रही
है
मैंने
तुझको
पुकारा
बहुत
है
इश्क़
मझधार
में
डूबते
को
तिनके
का
ही
सहारा
बहुत
है
जीत
ये
बाज़ी
हैं
उलझनों
की
फ़ाइदा
कम
ख़सारा
बहुत
है
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Jitendra "jeet"
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हम
उनके
बहकावे
में
आ
जाते
हैं
क्या
सच
में
यारा
हम
इतने
भोले
हैं
Jitendra "jeet"
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