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Jitendra "jeet"
kuchh baat likhi thii meter men
kuchh baat likhi thii meter men | कुछ बात लिखी थी मीटर में
- Jitendra "jeet"
कुछ
बात
लिखी
थी
मीटर
में
कुछ
शे'र
कहे
थे
सच्चे
से
- Jitendra "jeet"
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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बात
ये
है
कि
आदमी
शाइर
या
तो
होता
है
या
नहीं
होता
Mahboob Khizan
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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कू-ब-कू
फैल
गई
बात
शनासाई
की
उस
ने
ख़ुश्बू
की
तरह
मेरी
पज़ीराई
की
Parveen Shakir
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तुम्हारे
पास
आते
हैं
तो
साँसें
भीग
जाती
हैं
मोहब्बत
इतनी
मिलती
है
कि
आँखें
भीग
जाती
हैं
तबस्सुम
इत्र
जैसा
है
हँसी
बरसात
जैसी
है
वो
जब
भी
बात
करती
है
तो
बातें
भीग
जाती
हैं
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Aalok Shrivastav
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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ये
है
पहली
बात
तुझ
सेे
इश्क़
है
दूसरी
ये
बात,
पहली
बात
सुन
Siddharth Saaz
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वो
किसी
के
साथ
ख़ुश
था
कितने
दुख
की
बात
थी
अब
मेरे
पहलू
में
आ
कर
रो
रहा
है
ख़ुश
हूँ
मैं
Zubair Ali Tabish
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लोग
आए
खेल
खेले
चल
दिए
हम
थे
तन्हा
और
तन्हा
हो
गए
Jitendra "jeet"
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आम
से
ख़ास
यूँँ
कर
गए
वो
मुझे
होंठों
की
प्यास
यूँँ
कर
गए
वो
मुझे
वो
थे
मेरा
ह्रदय
और
ह्रदय
तोड़कर
जीते
जी
लाश
यूँँ
कर
गए
वो
मुझे
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Jitendra "jeet"
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उसने
ही
तो
काटा
है
अब
ये
सर
मेरा
जिस
की
बाँहों
में
सर
रख
सोने
वाले
थे
Jitendra "jeet"
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सोचो
वो
कैसे
जीते
होंगे
जिनके
आशिक़
उनकी
बाँहों
में
मर
जाते
हैं
Jitendra "jeet"
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टूट
कर
दर-बदर
हो
गया
एक
दिन
मैं
पुराना
शजर
हो
गया
एक
दिन
तू
अभी
तो
नहीं
है
मगर
क्या
पता
बे-वफ़ा
तू
भी
गर
हो
गया
एक
दिन
जानता
ही
न
था
कोई
कल
तक
मुझे
सुर्ख़ियों
की
ख़बर
हो
गया
एक
दिन
मैं
किनारे
खड़ा
जीत
की
आस
में
फिर
इधर
से
उधर
हो
गया
एक
दिन
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Jitendra "jeet"
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