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Jitendra "jeet"
usne hi to kaata hai ab ye sar meraa
usne hi to kaata hai ab ye sar meraa | उसने ही तो काटा है अब ये सर मेरा
- Jitendra "jeet"
उसने
ही
तो
काटा
है
अब
ये
सर
मेरा
जिस
की
बाँहों
में
सर
रख
सोने
वाले
थे
- Jitendra "jeet"
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इक
दिए
से
बँध
गई
है
मेरी
साँस
की
रिदम,
इक
लकीर
पर
टिकी
है
मेरी
ज़िंदगी
की
डोर
Aves Sayyad
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उसे
लगता
रहा
बस
वक़्त
काटा
जा
रहा
है
पर
मुझे
बातों
ही
बातों
में
मुहब्बत
हो
गई
उस
सेे
Ravi 'VEER'
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मैं
हूँ
पतंग-ए-काग़ज़ी
डोर
है
उस
के
हाथ
में
चाहा
इधर
घटा
दिया
चाहा
उधर
बढ़ा
दिया
Nazeer Akbarabadi
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जब
तक
है
डोर
हाथ
में
तब
तक
का
खेल
है
देखी
तो
होंगी
तुमने
पतंगें
कटी
हुई
Munawwar Rana
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एक
काटा
राम
ने
सीता
के
साथ
दूसरा
वनवास
मेरे
नाम
पर
Nasir Shahzad
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पतंग
ऐसे
नहीं
उड़ती
इसे
वैसे
उड़ाओ
तुम
वही
कहता
है
ये
अक्सर
जो
बस
चरखी
पकड़ता
है
Tanoj Dadhich
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गिरेगी
कौन
सी
छत
पे
ये
कब
किसे
मालूम
कटी
पतंग
हवाओं
के
इम्तिहान
में
है
Ghani Ejaz
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ज़िन्दगी
से
ऐसे
काटा
सीन
उसने
इश्क़
का
देखता
है
कोई
जैसे
फ़िल्म
गाने
काट
कर
Ankit Maurya
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उम्र
भर
साँप
से
शर्मिंदा
रहे
ये
सुन
कर
जब
से
इंसान
को
काटा
है
तो
फन
दुखता
है
Munawwar Rana
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एक
मुसलसल
कोशिश
यह
बतलाती
है
छैनी
से
पर्वत
काटा
जा
सकता
है
Divy Kamaldhwaj
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तुमको
हमारी
याद
का
सदक़ा
नहीं
रहा
तबसे
हमारा
हाल
भी
अच्छा
नहीं
रहा
Jitendra "jeet"
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नहीं
जाना
कभी
हमने
सबक
क्या
आशिक़ी
देगी
दिखाकर
हिज़्र
की
रातें
बसल
के
गीत
गाती
है
Jitendra "jeet"
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दिल-ए-बीमार
की
यारों
दवा
क्यूँ
पूछते
हो
तुम
तुम्हें
मालूम
है
फिर
भी
पता
क्यूँ
पूछते
हो
तुम
किया
जो
इश्क़
तो
जानाँ
नफ़ा
नुक़सान
मत
देखो
मुहब्बत
में
मिली
कैसे
सज़ा
क्यूँ
पूछते
हो
तुम
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Jitendra "jeet"
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लुटाता
फिर
रहा
है
फूल
सबको
महक
देता
नहीं
उपवन
हमारा
Jitendra "jeet"
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ये
ख़ुदा
तू
तो
ये
जानता
है
कितने
तरसे
हैं
इक
शख़्स
को
हम
Jitendra "jeet"
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