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Jitendra "jeet"
rakha sar god men maa ki to saari raat soya hooñ
rakha sar god men maa ki to saari raat soya hooñ | रखा सर गोद में माँ की तो सारी रात सोया हूँ
- Jitendra "jeet"
रखा
सर
गोद
में
माँ
की
तो
सारी
रात
सोया
हूँ
सुनाई
दे
रही
हैं
ये
किसी
की
लोरियाँ
मुझको
- Jitendra "jeet"
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उसे
यूँँ
चेहरा-चेहरा
ढूँढता
हूँ
वो
जैसे
रात-दिन
सड़कों
पे
होगा
Shariq Kaifi
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पैसा
कमाने
आते
हैं
सब
राजनीति
में
आता
नहीं
है
कोई
भी
खोने
के
वास्ते
छम्मो
का
मुजरा
सुनते
हैं
नेता
जो
रात
भर
संसद
भवन
में
आते
हैं
सोने
के
वास्ते
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Paplu Lucknawi
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नज़रें
हो
गड़ीं
जिनकी
वसीयत
पे
दिनो-रात
माँ-बाप
कि
'उम्रों
कि
दु'आ
खाक़
करेंगे
Asad Akbarabadi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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नींद
भी
जागती
रही
पूरे
हुए
न
ख़्वाब
भी
सुब्ह
हुई
ज़मीन
पर
रात
ढली
मज़ार
में
Adil Mansuri
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शब
जो
होली
की
है
मिलने
को
तिरे
मुखड़े
से
जान
चाँद
और
तारे
लिए
फिरते
हैं
अफ़्शाँ
हाथ
में
Mushafi Ghulam Hamdani
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फिर
से
मिलने
आ
गईं
तन्हाइयाँ
क्यूँँ
नहीं
खुलते
हैं
दफ़्तर
रात
में
Vikram Sharma
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भूला
नहीं
हूँ
आज
भी
हालात
गाँव
के
हाँ,
शहर
आ
गया
हूँ
मगर
साथ
गाँव
के
दुनिया
में
मेरा
नाम
जो
रोशन
हुआ
अगर
जलने
लगेंगे
बल्ब
भी
हर
रात
गाँव
के
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Tanoj Dadhich
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सिगरटें
चाय
धुआँ
रात
गए
तक
बहसें
और
कोई
फूल
सा
आँचल
कहीं
नम
होता
है
Wali Aasi
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जिसको
जाना
हाथ
छुड़ाकर
जाए
वो
जाने
वाले
हाथ
नहीं
पकड़े
जाते
Jitendra "jeet"
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लगाते
न
इल्ज़ाम
तुम
सर
हमारे
न
होते
तो
परिणाम
बेहतर
हमारे
Jitendra "jeet"
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मैंने
उसको
इतना
प्यार
किया
जितना
माँ
करती
है
बच्चे
से
Jitendra "jeet"
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उसने
इक
हद
तक
जाना
था
मुझको
जिस
हद
तक
उसने
पाना
था
मुझको
Jitendra "jeet"
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राम
बनोगे
तो
तुम
पूजे
जाओगे
इस
युग
में
रावण
का
वंदन
कौन
करे
Jitendra "jeet"
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