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Jitendra "jeet"
ham kamre men to jee bhar ke rote hain
ham kamre men to jee bhar ke rote hain | हम कमरे में तो जी भर के रोते हैं
- Jitendra "jeet"
हम
कमरे
में
तो
जी
भर
के
रोते
हैं
पर
हमने
दरवाज़े
हँसकर
खोले
हैं
मेरा
अच्छा
वक़्त
नहीं
आने
वाला
मुझ
सेे
कल
घड़ियों
के
काँटे
बोले
हैं
- Jitendra "jeet"
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डरा-धमका
के
तुम
हम
सेे
वफ़ा
करने
को
कहते
हो
कहीं
तलवार
से
भी
पाँव
का
काँटा
निकलता
है
Munawwar Rana
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उम्र
गुज़री
है
माँजते
ख़ुद
को
साफ़
हैं
पर
चमक
नहीं
पाए
डाल
ने
फूल
की
तरह
पाला
ख़ार
थे
ना
महक
नहीं
पाए
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Vishal Bagh
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उलटे
सीधे
सपने
पाले
बैठे
हैं
सब
पानी
में
काँटा
डाले
बैठे
हैं
Shakeel Jamali
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तुम्हें
ये
दुनिया
कभी
फूल
तो
नहीं
देगी
मिले
हैं
काँटे
तो
काँटों
को
ही
गुलाब
करो
Madan Mohan Danish
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माना
कि
इस
ज़मीं
को
न
गुलज़ार
कर
सके
कुछ
ख़ार
कम
तो
कर
गए
गुज़रे
जिधर
से
हम
Sahir Ludhianvi
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बुरी
सरिश्त
न
बदली
जगह
बदलने
से
चमन
में
आ
के
भी
काँटा
गुलाब
हो
न
सका
Arzoo Lakhnavi
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इक
ख़ार
क्या
चुभा
है
के
पगला
गए
जनाब
पौधा
गुलाब
का
था
वो
कहने
लगे
बबूल
Aqib khan
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काँटा
सा
जो
चुभा
था
वो
लौ
दे
गया
है
क्या
घुलता
हुआ
लहू
में
ये
ख़ुर्शीद
सा
है
क्या
Ada Jafarey
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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गुलशन
से
कोई
फूल
मुयस्सर
न
जब
हुआ
तितली
ने
राखी
बाँध
दी
काँटे
की
नोक
पर
Unknown
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जहाँ
पर
फूल
खिलते
थे
बहारें
साथ
गाती
थीं
चिढ़ातीं
आज
देखो
बाग़
की
वो
तितलियाँ
मुझको
Jitendra "jeet"
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जो
नहीं
होना
था
हो
गया
है
ये
मिरे
साथ
क्या
हो
गया
है
और
कोई
नहीं
है
मिरा
अब
दर्द
से
वास्ता
हो
गया
है
है
बहुत
डर
मुझे
टूटने
का
दिल
मिरा
आइना
हो
गया
है
इश्क़
में
अब
सभी
हैं
गुज़रते
क्या
बदन
रास्ता
हो
गया
है
इश्क़
में
जीत
कर
फिर
मिला
क्या
यार
ही
जब
जुदा
हो
गया
है
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Jitendra "jeet"
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ये
ख़ुदा
तू
तो
ये
जानता
है
कितने
तरसे
हैं
इक
शख़्स
को
हम
Jitendra "jeet"
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दिल-ए-बीमार
की
यारों
दवा
क्यूँ
पूछते
हो
तुम
तुम्हें
मालूम
है
फिर
भी
पता
क्यूँ
पूछते
हो
तुम
किया
जो
इश्क़
तो
जानाँ
नफ़ा
नुक़सान
मत
देखो
मुहब्बत
में
मिली
कैसे
सज़ा
क्यूँ
पूछते
हो
तुम
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Jitendra "jeet"
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कुछ
बात
लिखी
थी
मीटर
में
कुछ
शे'र
कहे
थे
सच्चे
से
Jitendra "jeet"
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