शामहो
आमसीशामहो
जिसकीहद-बंदियोंमेंक़फ़सभीहोंऔरआशियाँभी
हवाओंकीआहटपेखुलतेदरीचेभीहों
आईनोंमेंघिरेनन्हेमुन्नेपरिंदोंकारक़्स-ए-दम-ए-वापसीं
हरनफ़सपर-ब-परयूरिश-ए-राएगाँभी
आमसीशामहो
लेकिनइसशामकेरास्तेमेरेघरजारुकें
घरकीदहलीज़पर
मेरीमाँ
मुस्कुरातेहुएमेरेगिर्यांदिनोंकीथकनचूमले
शामकीसरहदोंसेमुअज़्ज़िनपुकारेतो
सबभाईबहनोंकीचुपमेंमिरीचुपभीहो
शामकीसेजपरबापकेजिस्मसेमेरेबाज़ूउगें
जबमुंडेरोंपेरक्खेदिएजगमगानेलगें
टूटतेफ़र्शपरमेराभीअक्सहो
मेराभीनामहो
आमसीशामहो
शामसीशामहो