so rahi theen naddiyan aur jhuk ga.e the barg-o-baar | सो रही थीं नद्दियाँ और झुक गए थे बर्ग-ओ-बार

  - Jauhar Nizami
सोरहीथींनद्दियाँऔरझुकगएथेबर्ग-ओ-बार
बुझगयाथाख़ाककीनब्ज़ोंमेंहस्तीकाशरार
चाँदनीमद्धमसीथीदरियाकीलहरेंथींख़मोश
बे-ख़ुदीकीबज़्ममेंटूटेपड़ेथेसाज़-ए-होश
भीनीभीनीबू-ए-गुलरक़्स-ए-हवाकुछभीथासहन-ए-गुलशनमेंउदासीकेसिवाकुछभीथा
इकहिजाब-ए-तीरगीथादीदा-ए-बेदारपर
कुछधुआँसाछारहाथाहुस्नकेअनवारपर
इसधुएँमेंरूहकीताबिंदगीखोतेहुए
मैंनेदेखानौ-ए-इंसानीकोगुमहोतेहुए
  - Jauhar Nizami
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