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Javed Aslam
jo hai hamraah vahii to ye khabar rakhta hai
jo hai hamraah vahii to ye khabar rakhta hai | जो है हमराह वही तो ये ख़बर रखता है
- Javed Aslam
जो
है
हमराह
वही
तो
ये
ख़बर
रखता
है
कौन
सा
वार
कहाँ
कितना
असर
रखता
है
आदमी
आता
है
दुनिया
में
अलिफ़
के
जैसा
फिर
ज़माना
यहाँ
ज़ेर
और
ज़बर
रखता
है
- Javed Aslam
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यार
तस्वीर
में
तन्हा
हूँ
मगर
लोग
मिले
कई
तस्वीर
से
पहले
कई
तस्वीर
के
बा'द
Umair Najmi
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अगर
हुकूमत
तुम्हारी
तस्वीर
छाप
दे
नोट
पर
मेरी
दोस्त
तो
देखना
तुम
कि
लोग
बिल्कुल
फ़ुज़ूल-ख़र्ची
नहीं
करेंगे
Rehman Faris
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क्या
लोग
हैं
कि
दिल
की
गिरह
खोलते
नहीं
आँखों
से
देखते
हैं
मगर
बोलते
नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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सब
लोग
जिधर
वो
हैं
उधर
देख
रहे
हैं
हम
देखने
वालों
की
नज़र
देख
रहे
हैं
Dagh Dehlvi
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उसको
जो
कुछ
भी
कहूँ
अच्छा
बुरा
कुछ
न
करे
यार
मेरा
है
मगर
काम
मेरा
कुछ
न
करे
दूसरी
बार
भी
पड़
जाए
अगर
कुछ
करना
आदमी
पहली
मोहब्बत
के
सिवा
कुछ
न
करे
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Abid Malik
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रो
रहा
है
बशर
मगर
देखो
ज़िन्दगी
को
रफ़ू
नहीं
करता
Tarun Pandey
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क़ब्रों
में
नहीं
हम
को
किताबों
में
उतारो
हम
लोग
मोहब्बत
की
कहानी
में
मरे
हैं
Ajaz tawakkal
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लोग
टूट
जाते
हैं
एक
घर
बनाने
में
तुम
तरस
नहीं
खाते
बस्तियाँ
जलाने
में
Bashir Badr
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मत
सहल
हमें
जानो
फिरता
है
फ़लक
बरसों
तब
ख़ाक
के
पर्दे
से
इंसान
निकलते
हैं
Meer Taqi Meer
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जो
लोग
ख़ुद
न
करते
थे
होंठों
से
पान
साफ़
पलकों
से
कर
रहे
हैं
तेरा
पायदान
साफ़
Charagh Sharma
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याद
वो
लौटा
गए
लेकिन
मिरा
एक
दिल
भी
था
वहाँ
खोया
हुआ
Javed Aslam
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ढूँढ़
लूँगा
नज़र
उठा
तो
सही
प्यार
दिल
में
तिरे
छुपा
होगा
Javed Aslam
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मोहब्बत
की
कहानी
मुख़्तसर
है
यह
आँखों
से
दिलों
तक
का
सफ़र
है
दिलों
का
दिल
से
मिलना
तो
है
आसाँ
दिमाग़ों
का
मिलन
मुश्किल
मगर
है
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Javed Aslam
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बदगुमानी,
अना,
हसद
'असलम'
ख़ाक
रिश्तों
पे
डार
जाते
हैं
Javed Aslam
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घर
मिरा
जगमगाया
करे
तू
यूँँ
ही
रोज़
आया
करे
चार
दिन
की
तो
हो
चाँदनी
फिर
अँधेरा
डराया
करे
मैं
बुलंदी
को
छूता
रहूँ
तोहमतें
वो
लगाया
करे
थाम
ले
हाथ
अपना
कोई
जब
क़दम
डगमगाया
करे
याद
अच्छी
मिरे
साथ
हो
तल्ख़ियाँ
धुँधलाया
करे
जब
भी
लौटूँ
मैं
घर
को
मिरे
माँ
खड़ी
मुस्कुराया
करे
देखा
सपने
में
जन्नत
में
थे
तुम
ही
थे
वो
ख़ुदाया
करे
तेरि
ख़ातिर
ऐ
'असलम'
यहाँ
क्यूँ
कोइ
वक़्त
ज़ाया'
करे
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Javed Aslam
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