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Javed Aslam
hamsafar the jo ek do pal ke
hamsafar the jo ek do pal ke | हम सेफ़र थे जो एक दो पल के
- Javed Aslam
हम
सेफ़र
थे
जो
एक
दो
पल
के
मेरे
दिल
के
वो
ख़ास
मेहमाँ
हैं
- Javed Aslam
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बहुत
चल
बसे
यार
ऐ
ज़िंदगी
कोई
दिन
की
मेहमान
तू
रह
गई
Dagh Dehlvi
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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मुझ
सेे
होकर
के
ही
बे-ज़ार
चले
जाते
हैं
मेरी
महफ़िल
से
मेरे
यार
चले
जाते
हैं
मुझको
मालूम
है
रहता
नहीं
है
अब
वो
वहाँँ
साल
में
फिर
भी
हम
इक
बार
चले
जाते
हैं
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Dipendra Singh 'Raaz'
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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चराग़
घर
का
हो
महफ़िल
का
हो
कि
मंदिर
का
हवा
के
पास
कोई
मसलहत
नहीं
होती
Waseem Barelvi
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अगर
लगता
है
वो
क़ाबिल
नहीं
है
तो
रिश्ता
तोड़ना
मुश्किल
नहीं
है
रक़ीब
आया
है
मेरे
शे'र
सुनने
तो
अब
ये
जंग
है
महफ़िल
नहीं
है
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Tanoj Dadhich
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फिर
आज
यारों
ने
तुम्हारी
बात
की
फिर
यार
महफ़िल
में
मिरी
खिल्ली
उड़ी
Harsh saxena
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मैं
ने
आबाद
किए
कितने
ही
वीराने
'हफ़ीज़'
ज़िंदगी
मेरी
इक
उजड़ी
हुई
महफ़िल
ही
सही
Hafeez Banarasi
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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लड़कपन
में
यहाँ
हर
चीज़
लामह़दूद
लगती
थी
बड़े
हो
कर
हुआ
इह़सास
दुनिया
कितनी
छोटी
है
Javed Aslam
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जो
ज़मीं
ख़ुद
कभी
न
हो
साकित
उस
ज़मीं
पर
फ़राग़
क्यूँ
ढूँढूँ
Javed Aslam
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जिस
को
जाना
है
वो
चले
जाए
अपनी
यादें
भी
साथ
ले
जाए
ज़िन्दगी
तो
गुज़ार
ही
लूँगा
मेरा
चैन-ओ-सुकूँ
भले
जाए
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Javed Aslam
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अगर
दुश्मन
तिरा
कोई
नहीं
है
समझ
ले
तुझ
में
हक़-गोई
नहीं
है
ख़ुदा
की
ज़ात
से
उम्मीद
रखिए
यहीं
है
ज़िन्दगी
खोई
नहीं
है
दुवा'ओं
का
उजाला
मिल
रहा
है
मिरी
माँ
अब
तलक
सोई
नहीं
है
जहाँ
में
काटना
पड़ता
है
वो
भी
जो
फ़सलें
हम
ने
ख़ुद
बोई
नहीं
है
हमारी
माँ
को
मेरा
हाल
कहदो
बहुत
अर्सा
हुआ
रोई
नहीं
है
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Javed Aslam
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ब-ज़ाहिर
पारसाओं
का
लबादा
ओढ़ने
वालों
नहीं
तुम
तोड़
पाओ
गे
वतन
को
तोड़ने
वालों
Javed Aslam
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