ख़ौफ़अभीजुड़ानथासिलसिला-ए-कलामसे
हर्फ़अभीबुझेनथेदहशत-ए-कम-ख़िरामसे
संग-ए-मलालकेलिएदिलआस्ताँहुआनथा
इक़्लीम-ए-ख़्वाबमेंकहींकोईज़ियाँहुआनथा
निकहत-ए-अब्र-ओ-बादकीमस्तीमेंडोलतेथेघर
साफ़दिखाईदेतेथे
उसकीगलीकेसबशजर
गर्दमिसाल-ए-दस्तकेंदरपेअभीजमीनथीं
रंग-ए-फ़िराक़-ओ-वस्लकीपरतेंअभीखुलीनथीं
ऐसेमेंथीकिसेख़बर
जबसाअत-ए-माहताबहो
यूँँभीतोहैकिऔरहीनक़्शा-ए-ख़ाक-ओ-आबहो