jhuki jhuki si nazrein | झुकी झुकी सी नज़रें

  - Jameel Azimabadi
झुकीझुकीसीनज़रें
क्यूँहैं
उड़ीउड़ीसीरंगतक्यूँहै
चुपचुपक्यूँहैं
ख़ौफ़केमारे
गुम-सुमकाक्यूँ
रूपहैंधारे
येघरतो
हमसबकाघरहै
खुलाहुआ
जिसघरकादरहै
शाहोंकादरबारनहींहैपीरोंकीदरगाहनहींहै
माँगेंहम
बे-रोकजोचाहें
सबपरयेदरबारखुलाहै
गोरेकाले
एकहैंसारे
राजाप्रजाहाथपसारे
हमभीकहदें
जोकहनाहै
डरतेक्यूँहैंयेवोदरहै
जिसकेआगे
एकहैंसारे
झूटेहैंसबऔरसहारे
  - Jameel Azimabadi
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