jism ke khol se nikloon to qaza ko dekhooñ | जिस्म के ख़ोल से निकलूँ तो क़ज़ा को देखूँ

  - Jaleel 'Aali'
जिस्मकेख़ोलसेनिकलूँतोक़ज़ाकोदेखूँ
बुतकोरस्तेसेहटाऊँतोख़ुदाकोदेखूँ
ऐसाक्याजुर्महुआहैकितड़पतेमरते
अपनेएहसासकीसूलीपेअनाकोदेखूँ
बोलतीआँखकारसहँसतेहुएलफ़्ज़कारूप
बातनज़रोंकीसुनूँयाकिसदाकोदेखूँ
इनकीक़िस्मतकिखिलेंरोज़तमन्नाकेगुलाब
मेरीतक़दीरकिज़ख़्मोंकीचिताकोदेखूँ
इसतवक़्क़ो'पेकिशायदकोईदरवेशमिले
ग़ौरसेशहरकेएकएकगदाकोदेखूँ
मुझकोतहज़ीबकेमकतबनेसिखायाहैयही
तख़्ती-ए-दिलपढ़ूँरंग-ए-क़बाकोदेखूँ
  - Jaleel 'Aali'
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