yaad aa ke tiri hijr men samjhaayegi kis ko | याद आ के तिरी हिज्र में समझाएगी किस को

  - Jalal Lakhnavi
यादकेतिरीहिज्रमेंसमझाएगीकिसको
दिलहीनहींसीनेमेंतोबहलाएगीकिसको
दमखिंचताहैक्यूँँआजयेरगरगसेहमारा
क्याजानेइधरदिलकीकशिशलाएगीकिसको
उठनेहीनहींदेतीहैजबयासबिठाकर
फिरशौक़कीहिम्मतकहींलेजाएगीकिसको
जबमारहीडालाहमेंबे-ताबी-ए-दिलने
करवटशब-ए-फ़ुर्क़तमेंबदलवाएगीकिसको
मरजाएँगेबे-मौतग़म-ए-हिज्रकेमारे
आएगीतोअबज़िंदाअजलपाएगीकिसको
अच्छारहेतस्वीरकिसीकीमिरेदिलपर
कम-बख़्तठहरेगातोठहराएगीकिसको
कुछबैठगयादिलहीयहाँबैठकेअपना
ग़ैरततिरीमहफ़िलसेअबउठवाएगीकिसको
इसवादा-ख़िलाफ़ीनेअगरजानहीलेली
फिरझूटीतसल्लीतिरीतड़पाएगीकिसको
क्यूँँलेंगे'जलाल'केमिरेदिलमेंवोचुटकी
झपकेगीपलककाहेकोनींदआएगीकिसको
  - Jalal Lakhnavi
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