jafaa ki us se shikaayat zaraa nahin aati | जफ़ा की उस से शिकायत ज़रा नहीं आती

  - Jalal Lakhnavi
जफ़ाकीउससेशिकायतज़रानहींआती
वोयादहीहमेंशुक्र-ए-ख़ुदानहींआती
निकलकेता-ब-लबआह-ए-रसानहींआती
कराहताहैजोअबदिलसदानहींआती
हमारीख़ाककीमिट्टीहैक्याख़राबचर्ख़
कभीइधरकोउधरकीहवानहींआती
शब-ए-विसालकहाँख़्वाब-ए-नाज़कामौक़ा
तुम्हारीनींदकोआतेहयानहींआती
अदूहमारीअयादतकोलेकेआएउन्हें
कहाँयेमररहीअबभीक़ज़ानहींआती
लहदपेआएथेदोफूलभीचढ़ाजाते
अभीतकआपमेंबू-ए-वफ़ानहींआती
मिरीलहदकोवोउनकायेकहकरठुकराना
सदा-ए-नारा-ए-सद-मर्हबानहींआती
सितमहैऔरमिरेदिल-शिकनकायेकहना
शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिलकीसदानहींआती
'जलाल'हमयेमानेंगेतूउसेनहींयाद
तुझेकभीकोईहिचकीभीक्यानहींआती
  - Jalal Lakhnavi
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