kahaan gaya vo zamaana ki jis ki yaad men aaj | कहाँ गया वो ज़माना कि जिस की याद में आज

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
कहाँगयावोज़मानाकिजिसकीयादमेंआज
भुलाएबैठाहूँख़ुदकोपतानहींमिलता
गईकहाँहैवोअबसूरतेंमोहब्बतकी
ज़मानेभरमेंकहींनक़्श-ए-पानहींमिलता
मैंपूछूँकिससेपताऔरकहाँकहाँढूँडूँ
वहाँकाकोईभीआयागयानहींमिलता
वोअस्पतालकीशबभीथीक्याक़यामतकी
वहाँक़फ़ससेजोताइरउड़ानहींमिलता
नहीफ़बाज़ूथेमेरेलिएहिसार-ए-अमाँ
मज़ाकहींभीउसआग़ोशकानहींमिलता
वोबुझतीआँखेंथीमेरेलिएचराग़-ए-हयात
निगाह-ए-मेहरकाअबवोदियानहींमिलता
तमीज़कैसेकरूँँरहज़न-ओ-रफ़ीक़मेंअब
रह-ए-हयातकावोरहनुमानहींमिलता
बसएकदमसेवोबदलीहवाज़मानेकी
किशैख़मिलतेहैंदिलबा-सफ़ानहींमिलता
बलाकाशोरहैउल्फ़तकेमय-कदेमेंमगर
शराबमिलतीहैलेकिननशानहींमिलता
हुईहैरूहवोअबजज़्ब-ए-रूह-ए-पाक-ए-अज़ीम
मिलाजोज़ातमेंउसकीजुदानहींमिलता
वोगोयाअब्रकासायाथालेउड़ीजोहवा
बिखरकेफूलकाजैसेपतानहींमिलता
वोएकनग़्माथागुमहोगयाफ़ज़ाओंमें
किजैसेबहरमेंक़तरागिरानहींमिलता
तलाशउनकीयहाँहै'हबीब'ला-हासिल
किचश्म-ए-तरसेजोआँसूगिरानहींमिलता
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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