ulfat ke fasaane maazi ke kuchh bhule kuchh yaad aa bhi ga.e | उल्फ़त के फ़साने माज़ी के कुछ भूले कुछ याद आ भी गए

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
उल्फ़तकेफ़सानेमाज़ीकेकुछभूलेकुछयादभीगए
ग़मकेबादलदिलपेमिरेकुछछटभीगएकुछछाभीगए
जबइश्क़कीवादीमेंहमतुमलेकरहाथोंमेंहाथचले
गोख़ारभीउलझेदामनमेंकुछलम्हेगुलबरसाभीगए
जबराज़-ए-मोहब्बतमुझसेसुनाकुछवोभीपसीजेदमभरको
चुपरहतेहुएकुछकहभीगएऔरकहतेहुएकतराभीगए
बाज़ीमेंमोहब्बतकीअक्सरकुछमरहलेऐसेआएहैं
जबजीतकेभीहमहारगएऔरहारकेहमकुछपाभीगए
वोआएऔरकुछहालपूछादिलकादर्दभीकुछसुना
यूँँदेखकिउनकोदिलकेकँवलकुछखिलभीगएमुरझाभीगए
उलझीसीहैंइश्क़कीराहेंजोखिमसीकुछइश्क़कीमंज़िल
इनराहोंमेंकुछखोभीगएऔरमंज़िलकोकुछपाभीगए
गोलाखजतनहमनेभीकिएपरक़ल्बकीतस्कींहोसकी
अरमानोंसेदिलख़ालीहुआकुछघुटभीगएकुछपाभीगए
क्याजानेहमक्याकहबैठेवोकहसकेजोकहनाथा
हमप्यारकेताने-बानेकोसुलझाभीगएउलझाभीगए
येहुस्नकीमस्तीउनकी'हबीब'येक्याहीअनोखीमस्तीहै
कुछख़ुदभीहुएबे-ख़ुदउससेकुछबे-ख़ुदहमकोबनाभीगए
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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