tiri mohabbat men gham jo aa.e to us se badh kar khushi nahin hai | तिरी मोहब्बत में ग़म जो आए तो उस से बढ़ कर ख़ुशी नहीं है

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
तिरीमोहब्बतमेंग़मजोआएतोउससेबढ़करख़ुशीनहींहै
वफ़ाकीमंज़िलकेख़ारमेंभीगुलोंसेकमदिल-कशीनहींहै
तुझमेंजुरअतहैरिंदकीसीतुझमेंवुसअ'तदिल-ओ-नज़रकी
अज़ीमशयहैयेरस्म-ए-रिंदीयेसिर्फ़बादा-कशीनहींहै
लिबास-ए-नौमेंहवसनेकरमज़ाक़-ए-हुस्न-ओ-नज़रहैंबदले
वोइश्क़मेंहैसरफ़रोशीवोहुस्नमेंदिलबरीनहींहै
तुझीसेगर्मीथीमहफ़िलोंकीतुझीसेथीवोचमनकीसैरें
नहींवोमहफ़िलमेंलुत्फ़बाक़ीगुलोंकेलबपरहँसीनहींहै
नहींयेमुमकिनकिउसकेदरसेतूख़ालीदामनहीलौटजाए
तलबहीतेरीहैख़ामअबतकनज़रभीदरपरजमीनहींहै
ख़िरदकीगोहैंहज़ारआँखेंहैदिलकीसिर्फ़एकआँखलेकिन
जोदिलकीबुझजाएशम-ए-उल्फ़ततोफिरकहींरौशनीनहींहै
ग़म-आश्नातेरादिलनहींहैतोआएउसमेंगुदाज़कैसे
जोसाज़दिलकानहींहैटूटातोउसमेंफिरनग़्मगीनहींहै
करोगेक्यातुम'हबीब'आख़िरहयात-ए-तूल-ओ-तवीललेकर
तबस्सुम-ए-गुलकेएकलम्हेमेंक्याकोईज़िंदगीनहींहै
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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