dard minnat-kash-e-darmaan ho zaroori to nahin | दर्द मिन्नत-कश-ए-दरमाँ हो ज़रूरी तो नहीं

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
दर्दमिन्नत-कश-ए-दरमाँहोज़रूरीतोनहीं
ज़ख़्ममरहमकाहीख़्वाहाँहोज़रूरीतोनहीं
दिलकीगहराईमेंदाग़ोंकेचमनखिलतेहैं
मेराहरज़ख़्मनुमायाँहोज़रूरीतोनहीं
आगहैदोनोंतरफ़गरचेबराबरकीलगी
फिरभीमुझसावोपरेशाँहोज़रूरीतोनहीं
हिज्रमेंतेरेतसव्वुरकेमज़ेक्याकहने
हरकोईदीदकाख़्वाहाँहोज़रूरीतोनहीं
मुंतज़िरमैंतिरेआनेकारहूँगाहर-दम
झूटाहरइकतिरापैमाँहोज़रूरीतोनहीं
दिलसेचाहूँमैंजिसेवोभीतोचाहेमुझको
पूराऐसाकभीअरमाँहोज़रूरीतोनहीं
मौतआतीहैकभीमादर-ए-मुशफ़िक़कीतरह
इससेहरशख़्सगुरेज़ाँहोज़रूरीतोनहीं
इश्क़नेनासेह-ए-मुश्फ़िक़कीसुनीहीकबथी
अक़्लहीदिलकीनिगहबाँहोज़रूरीतोनहीं
खेतेकिसवास्तेकश्तीकोहोसाहिलसाहिल
यहाँख़तरा-ए-तूफ़ाँहोज़रूरीतोनहीं
मैंसमझतातोहूँअंजाम-ए-मोहब्बतको'हबीब'
दिलइसअंजामसेलर्ज़ांहोज़रूरीतोनहीं
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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