be-taalluq zindagi bhi zindagi hoti hai kya | बे-तअल्लुक़ ज़िंदगी भी ज़िंदगी होती है क्या

  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
बे-तअल्लुक़ज़िंदगीभीज़िंदगीहोतीहैक्या
साज़-ए-दिलख़ामोशहोतोनग़्मगीहोतीहैक्या
यक-ब-यकतारीकदिलमेंक्यूँउजालाहोगया
याद-ए-यार-ए-मेहरबाँसेरौशनीहोतीहैक्या
देखकरतुझकोकरेगाकोईक्यूँसैर-ए-चमन
गुलकेचेहरेपरभीऐसीताज़गीहोतीहैक्या
जिसनेतेरेहुस्नकीलौदेखलीसमझाहैवो
क्यूँचमकतेहैंसितारेचाँदनीहोतीहैक्या
मस्तआँखोंकीक़समक्यूँरहगयाहाथोंमेंजाम
मय-कदेमेंबिन-पिएभीमय-कशीहोतीहैक्या
वस्लहोयाहिज्रहोयाइंतिज़ार-ए-यारहो
दर्द-ए-दिलमेंहसरतोंमेंकुछकमीहोतीहैक्या
सादगीमेंदिलबरीहैदिलबरीमेंसादगी
कोईक्यासमझेकिउनकीसादगीहोतीहैक्या
यादतेरीआईहैपरदेसमेंकितनी'हबीब'
दूरी-ए-मंज़िलमेंकोईदिलकशीहोतीहैक्या
  - JaiKrishn Chaudhry Habeeb
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