baarha bas mujhe yuñ lagta hai | बारहा बस मुझे यूँँ लगता है

  - Jai Raj Singh Jhala
बारहाबसमुझेयूँँलगताहै
हैकोईजोमुझेहीतकताहै
ख़्वाबरातोंमेंख़्वाबमेंकर
ख़्वाबकीहीतरहबिखरताहै
रौशनाईनिगलगयाथाजो
सायावोआँखोंमेंखटकताहै
दिनकेसन्नाटेमेंक़रीबकर
रम्ज़पेशानीपरटहलताहै
ज़मींप्यासीहीरहेगीतू
आसमाँसेधुआँबरसताहै
कोईबूख़ाककरगईशायद
देखफूलोंकोजीमचलताहै
ग़म-तलबकबतलकरहेकोई
अबलहूआँखोंसेटपकताहै
  - Jai Raj Singh Jhala
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