kyun zulm dhaa raha hooñ main apne vujood par | क्यूँँ ज़ुल्म ढा रहा हूँ मैं अपने वजूद पर

  - Jahangeer nayab
क्यूँँज़ुल्मढारहाहूँमैंअपनेवजूदपर
कीचड़उछालताहूँमैंअपनेवजूदपर
इंकारकरकेख़ुदहीमैंअपनेवजूदका
ग़ुस्साउतारताहूँमैंअपनेवजूदपर
क्याचाहताहूँख़ुदसेमुझेख़ुदनहींपता
औरता'नछोड़ताहूँमैंअपनेवजूदपर
डरहैकोईचुरालेमुझसेकभीमुझे
पहरेलगारहाहूँमैंअपनेवजूदपर
करकेख़ुदअपनेसारेसुबूतोंकोमुस्तरद
उँगलीउठारहाहूँमैंअपनेवजूदपर
'नायाब'मुझसेफ़ैज़उठाताहैहरकोई
कबदाग़-ए-बद-नुमाहूँमैंअपनेवजूदपर
  - Jahangeer nayab
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