apne hisaar-e-zaat men uljha hua hooñ main | अपने हिसार-ए-ज़ात में उलझा हुआ हूँ मैं

  - Jahangeer nayab
अपनेहिसार-ए-ज़ातमेंउलझाहुआहूँमैं
या'नीकिकाएनातमेंउलझाहुआहूँमैं
क़ाबूमेंआजदिलनहींक्याहोगयामुझे
फिरआजख़्वाहिशातमेंउलझाहुआहूँमैं
जैसेकिहोनेवालीहैअनहोनीफिरकोई
हर-पलतवहहुमातमेंउलझाहुआहूँमैं
कुछअपनाफ़र्ज़प्यारतिराफ़िक्र-ए-रोज़गार
कितनेहीवारदातमेंउलझाहुआहूँमैं
फ़ुर्सतकहाँबनाऊँमरासिमनएनए
पिछलेतअ'ल्लुक़ातमेंउलझाहुआहूँमैं
सबहैंअसीर-ए-रंज-ओ-अलमइसजहानमें
तन्हाकहाँहयातमेंउलझाहुआहूँमैं
'नायाब'जबनहींहैवफ़ाओंकाउसकोपास
फिरक्यूँँतकल्लुफ़ातमेंउलझाहुआहूँमैं
  - Jahangeer nayab
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