shukr ki ja hai ki pasti men yahiin tak pahunchen | शुक्र की जा है कि पस्ती में यहीं तक पहुँचे

  - Jagdish Sahay Saxena
शुक्रकीजाहैकिपस्तीमेंयहींतकपहुँचे
आसमाँसेजोगिरेहमतोज़मींतकपहुँचे
हैयेतक़दीरकीख़ूबीकिनिगाह-ए-मुश्ताक़
पर्दाबनजाएअगरपर्दा-नशींतकपहुँचे
जाममीनाकीक़समहस्ती-सहबाकीक़सम
बादा-कशएकहीलग़्ज़िशमेंयक़ींतकपहुँचे
ऐसीतक़दीरकहाँहैकिनसीम-ए-कू-ए-दोस्त
भूलकरराहकिसीख़ाक-नशींतकपहुँचे
करचुकारू-ए-ज़मींकाजोबशरकामतमाम
येतमन्नाहैकिअबचर्ख़-ए-बरींतकपहुँचे
  - Jagdish Sahay Saxena
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