basaarat kho gaii hai raushni men | बसारत खो गई है रौशनी में

  - Jagdish Prakash
बसारतखोगईहैरौशनीमें
मज़ाआनेलगाहैतीरगीमें
सराबोंसेसराबोंकेसफ़रतक
तड़पबढ़तीगईहैतिश्नगीमें
येडेराजोगियोंकाहैयहींपर
मिलेगाखोदियाजोज़िंदगीमें
मुख़ातिबतुमसेहूँमैंकुछतोबोलो
कटेगीरातक्याबेचारगीमें
दु'आकेबा'दपत्थरभीमिलेंगे
यहीतोलुत्फ़हैदीवानगीमें
तिरीचाहतमेंजोकुछपालियाहै
नहींहासिलहुआवोबंदगीमें
नहींपहचानतामुझकोमिराघर
बनाहूँअजनबीआवारगीमें
  - Jagdish Prakash
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