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Jagat Singh
hichkichahat hai muhabbat men teri baaki abhii bhi
hichkichahat hai muhabbat men teri baaki abhii bhi | हिचकिचाहट है मुहब्बत में तेरी बाक़ी अभी भी
- Jagat Singh
हिचकिचाहट
है
मुहब्बत
में
तेरी
बाक़ी
अभी
भी
दर
खुला
तो
है
मगर
दर
पे
ये
पहरेदारी
सी
है
- Jagat Singh
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वही
मंज़िलें
वही
दश्त
ओ
दर
तिरे
दिल-ज़दों
के
हैं
राहबर
वही
आरज़ू
वही
जुस्तुजू
वही
राह-ए-पुर-ख़तर-ए-जुनूँ
Noon Meem Rashid
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ये
जो
दीवार
अँधेरों
ने
उठा
रक्खी
है
मेरा
मक़्सद
इसी
दीवार
में
दर
करना
है
Azm Shakri
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जो
मेरे
साथ
मोहब्बत
में
हुई
आदमी
एक
दफा
सोचेगा
रात
इस
डर
में
गुजारी
हमने
कोई
देखेगा
तो
क्या
सोचेगा
Tehzeeb Hafi
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अब
तो
उस
सूने
माथे
पर
कोरेपन
की
चादर
है
अम्मा
जी
की
सारी
सजधज,
सब
ज़ेवर
थे
बाबूजी
कभी
बड़ा
सा
हाथ
ख़र्च
थे
कभी
हथेली
की
सूजन
मेरे
मन
का
आधा
साहस,
आधा
डर
थे
बाबूजी
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Aalok Shrivastav
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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एक
नया
'आशिक़
है
उसका,
जान
छिड़कता
है
उसपर
मुझको
डर
है
वो
भी
इक
दिन
मय-ख़ाने
से
निकलेगा
Siddharth Saaz
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घर
में
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
काम
पर
भी
नहीं
जा
रहा
जाने
क्या
ख़ौफ़
है
जो
तुझे
चूम
कर
भी
नहीं
जा
रहा
रात
के
तीन
बजने
को
है
यार
ये
कैसा
महबूब
है
जो
गले
भी
नहीं
लग
रहा
और
घर
भी
नहीं
जा
रहा
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Tehzeeb Hafi
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ये
जबरन
ख़ुश
रहने
का
नाटक
मुझ
सेे
न
हो
पाएगा
दर्द
उठेगा
जब
दिल
में
आँखों
से
आँसू
आएगा
जीवन
का
आधा
हिस्सा
मेरा
आधा
तुम
रख
लेना
आधा
आधा
होकर
ही
जीवन
पूरा
हो
पाएगा
कितना
कितना
तेरा
है
घर
कितना
कितना
मेरा
है
जितना
जितना
पूछेंगे
हम
उतना
घर
जल
जाएगा
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Jagat Singh
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तुम
शादी
करो
पहले
फिर
इश्क़
भी
कर
लेना
है
इश्क़
ज़माने
का
ख़ुद
इश्क़
से
मुस्तसना
Jagat Singh
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सज
सवर
कर
उसने
पूछा
कैसी
हूँ
मैं
लग
रही
इक
तरफ़
को
सर
झुका
कर
उसको
मैं
तकता
रहा
Jagat Singh
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महीना
जनवरी
का
सर्द
तर
मुझको
दिलाता
याद
उसकी
है
जो
इस
मौसम
में
बाहर
निकले
तो
हल्की
गुलाबी
सी
हो
जाती
है
Jagat Singh
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'जगत'
मुझे
मार
कर
के
ख़ंजर
वो
पूछती
ठीक
तो
हो
ना
तुम
ज़बान
पर
देखो
तरबियत
इसकी
,लड़की
ये
कितनी
बा-हया
है
Jagat Singh
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