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Jagat Singh
saj savar kar usne poocha kaisi hooñ main lag rahi
saj savar kar usne poocha kaisi hooñ main lag rahi | सज सवर कर उसने पूछा कैसी हूँ मैं लग रही
- Jagat Singh
सज
सवर
कर
उसने
पूछा
कैसी
हूँ
मैं
लग
रही
इक
तरफ़
को
सर
झुका
कर
उसको
मैं
तकता
रहा
- Jagat Singh
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मुसाफ़िरों
के
दिमाग़ों
में
डर
ज़ियादा
है
न
जाने
वक़्त
है
कम
या
सफ़र
ज़ियादा
है
Hashim Raza Jalalpuri
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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बंद
कमरा,
सर
पे
पंखा,
तीरगी
है
और
मैं
एक
लड़ाई
चल
रही
है
ज़िंदगी
है
औऱ
मैं
Shadab Asghar
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उन्हीं
रास्तों
ने
जिन
पर
कभी
तुम
थे
साथ
मेरे
मुझे
रोक
रोक
पूछा
तिरा
हम-सफ़र
कहाँ
है
Bashir Badr
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ये
शाम
ख़ुशबू
पहन
के
तेरी
ढली
है
मुझ
में
जो
रेज़ा
रेज़ा
मैं
क़तरा
क़तरा
पिघल
रही
हूँ
ख़मोश
शब
के
समुंदरों
में
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Kiran K
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तन्हा
ही
सही
लड़
तो
रही
है
वो
अकेली
बस
थक
के
गिरी
है
अभी
हारी
तो
नहीं
है
Ali Zaryoun
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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ज़िंदगी
यूँँ
हुई
बसर
तन्हा
क़ाफ़िला
साथ
और
सफ़र
तन्हा
Gulzar
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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सिवा
इसके
कुछ
अच्छा
ही
नहीं
लगता
है
शामों
में
सफ़र
कैसा
भी
हो
घर
को
परिंदे
लौट
जाते
हैं
Aarush Sarkaar
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'जगत'
तब
इक
परिंदा
क़ैद
मैंने
कर
लिया
था
जब
कहा
तूने
कि
अब
से
दोस्त
बनकर
ही
रहेंगे
हम
Jagat Singh
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मन
के
सारे
सपने
सपने
रह
गए
कितने
थे
हम
और
कितने
रह
गए
जल
चुका
सब
फिर
भी
ऐसा
लगता
है
कोयले
कुछ
अब
भी
तपने
रह
गए
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Jagat Singh
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मेरी
अर्थी
के
पीछे
पढ़ोगे
जो
तुम
नज़्म
वो
भी
बना
कर
गया
है
जगत
Jagat Singh
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जो
ग़म
लिखा
है
पहले
सहा
है
उसे
मैंने
मेरी
लिखी
ग़ज़लें
ज़रा
भी
आम
नहीं
हैं
Jagat Singh
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कोई
है
ही
नहीं
बात
किस
सेे
करें
चाँद
भी
बादलों
में
कहीं
छुप
गया
Jagat Singh
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