ravaan kis ko khabar unwan-e-aaghaaz-e-jahaan kya tha | रवाँ' किस को ख़बर उनवान-ए-आग़ाज़-ए-जहाँ क्या था

  - Jagat Mohan Lal Ravan
रवाँ'किसकोख़बरउनवान-ए-आग़ाज़-ए-जहाँक्याथा
ज़मींकाक्याथानक़्शाऔररंग-ए-आसमाँक्याथा
यहीहस्तीइसीहस्तीकेकुछटूटेहुएरिश्ते
वगरनाऐसापर्दामेरेउनकेदरमियाँक्याथा
तिराबख़्शाहुआदिलऔरदिलकीयेहवस-कारी
मिराइसमेंक़ुसूरदस्त-गीर-ए-आसियाँक्याथा
अगरकुछरोज़ज़िंदारहकेमरजानामुक़द्दरहै
तोइसदुनियामेंआख़िरबाइस-ए-तख़्लीक़-ए-जाँक्याथा
हमइतनेफ़ासलेपरगएहैंअहद-ए-माज़ीसे
ख़बरयेभीनहींअज्दादकानाम-ओ-निशाँक्याथा
किसीबर्क़-ए-तजल्लीपरज़रासाग़ौरकरलेना
अगरयेजाननाहोआलम-ए-रूह-ए-रवाँक्याथा
  - Jagat Mohan Lal Ravan
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