azaad zaraa dekh tu ye aalam-e-arzang | आज़ाद'! ज़रा देख तू ये आलम-ए-अर्ज़ंग

  - Jagan Nath Azad
आज़ाद'!ज़रादेखतूयेआलम-ए-अर्ज़ंग
मौसमकेयेअंदाज़बहारोंकेयेनैरंग
येहुस्न,येतरतीब,येतज़ईनयेआहंग
दामान-ए-ख़िरदचाकहैदामान-ए-नज़रतंग
हरज़र्राहैदामनमेंलिएतूरकीदुनिया
हरबातमेंइकबातहैहररंगमेंसौरंग
रूह-ए-बशर!तुझसेहैंदोनोंमुतकल्लिम
सब्ज़ेकीख़मोशीहैकिझरनोंकाहैआहंग
अबछोड़भीअफ़्सुर्दगीअपनीदिल-ए-नादाँ
अबफूलभीहोखिलकेतूग़ुंचा-ए-दिल-तंग
हरशयसेहुवैदाहैझलकहुस्न-ए-अज़लकी
ज़र्राहैकिताराहैशगूफ़ाहैकिहैसंग
सबअक्सतिरेअक्सहैंसूरत-ए-पिन्हाँ
सबरंगतिरेरंगहैंहस्ती-ए-बे-रंग
देखनेवालो!येज़राबाततोदेखो
पत्तेहैंशफ़क़-रंगतोपत्थरहैंसमन-रंग
सबकुछयेबजाहैमगरहुस्न-ए-गुरेज़ाँ
तूकितिरीचालपेक़ुर्बांजमनगंग
इसराहमेंगरसाथतिराहोमुयस्सर
लिद्दरफ़क़तआवाज़हैगुल-मर्गफ़क़तरंग
  - Jagan Nath Azad
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