KHvaab ki seedhiyaan | ख़्वाब की सीढ़ियाँ

  - Jafar Sahni
ख़्वाबकीसीढ़ियाँ
लम्हालम्हा
उतरताहुआऔरचढ़ताहुआ
धूपबादलमेंलोटेंलगाताहुआ
फूलसेख़ारसे
वोगुज़रताहुआ
आरज़ूकीथकन
तिश्नगीकीशिकन
दिलपेमजमाकिए
आज
आँगनकेतारीकगोशेमें
अम्बारपरकूड़ेके
ज़ंग-आलूद
इकक़ुफ़्लसारहगयाहै
कलीद-ए-वफ़ासे
नहींजिसका
कोईभीनाता
  - Jafar Sahni
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