kabhi naazuk kabhi behad kada hai | कभी नाज़ुक कभी बेहद कड़ा है

  - Jafar Sahni
कभीनाज़ुककभीबेहदकड़ाहै
वो'तुग़्लक़'सामनेबनकरखड़ाहै
ख़राशेंपड़गईहैंआसमाँपर
ज़मींसेआजशायदवोलड़ाहै
वोअबबे-कारशयहैअपनेघरकी
कभीअंदरकभीबाहरपड़ाहै
ज़मानासाथथाबादलमेंउसके
चमकतीधूपमेंतन्हाखड़ाहै
ख़िज़ाँकारंगहैकैसासुहाना
पत्तापेड़सेकोईझड़ाहै
बहुतइल्ज़ामकीबारिशहुईथी
ठहरीबूँदवोचिकनाघड़ाहै
मुक़द्दरख़्वाबसाएकाहैचमका
मिरेक़दसेभी'जाफ़र'वोबड़ाहै
  - Jafar Sahni
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