चमनमेंख़ारहीक्यागुलभीदिल-फ़िगारमिले
फ़रेब-ख़ुर्दा-ए-रंगीनी-ए-बहारमिले
मज़ातोजबहैकिवोआफ़्ताब-ए-सुब्ह-ए-जमाल
गलेलिपटकेसर-ए-शाम-ए-इंतिज़ारमिले
निगाह-ए-याससेमुँहतकरहाहूँइकइकका
कोईतोबज़्म-ए-रक़ीबाँमेंग़म-गुसारमिले
जिन्होंनेअपनेलहूसेचमनकोसींचाथा
उन्हींकेजैब-ओ-गरेबानतारतारमिले
मैंउनकेवा'दोंकायूँँभीयक़ीनकरताहूँ
मिलेमिलेनमिलेलुत्फ़-ए-इंतिज़ारमिले
क़फ़सकेबा'दचमनमेंयेदेखनाहैमुझे
ख़िज़ाँमिलेकिवहाँमौसम-ए-बहारमिले
वहीतोफ़िक्र-ए-सुख़नआज-कलकरे'जाफ़र'
जिसेहयातकामाहौलख़ुश-गवारमिले