ashaar mere yuñ to zamaane ke li.e hain | अशआ'र मेरे यूँँ तो ज़माने के लिए हैं

  - Jaan Nisar Akhtar
अशआ'रमेरेयूँँतोज़मानेकेलिएहैं
कुछशे'रफ़क़तउनकोसुनानेकेलिएहैं
अबयेभीनहींठीककिहरदर्दमिटादें
कुछदर्दकलेजेसेलगानेकेलिएहैं
सोचोतोबड़ीचीज़हैतहज़ीबबदनकी
वर्नायेफ़क़तआगबुझानेकेलिएहैं
आँखोंमेंजोभरलोगेतोकाँटोंसेचुभेंगे
येख़्वाबतोपलकोंपेसजानेकेलिएहैं
देखूँतेरेहाथोंकोतोलगताहैतेरेहाथ
मंदिरमेंफ़क़तदीपजलानेकेलिएहैं
येइल्मकासौदायेरिसालेयेकिताबें
इकशख़्सकीयादोंकोभुलानेकेलिएहैं
  - Jaan Nisar Akhtar
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