saa.e kii tarah badh na kabhi kad se ziyaada | साए की तरह बढ़ न कभी क़द से ज़ियादा

  - Iqbal Sajid
साएकीतरहबढ़कभीक़दसेज़ियादा
थकजाएगाभागेगाअगरहदसेज़ियादा
मुमकिनहैतेरेहाथसेमिटजाएँलकीरें
उम्मीदरखगौहर-ए-मक़्सदसेज़ियादा
लगजाएतुझपरहीतेरेक़त्लकाइल्ज़ाम
बदनामतोहोताहैबुराबदसेज़ियादा
ख़्वाहिशहैबड़ाईकीतोअंदरसेबड़ाबन
करज़ेहनकीभीनश्व-ओ-नुमाक़दसेज़ियादा
देखूँतोमेरेजिस्मपेशाख़ेंहैंपत्ते
सोचूँतोघनाछाँवमैंबरगदसेज़ियादा
रहनेदोख़लाओंमेंमेरीक़ब्रखोदो
हैप्यारमुझेख़ाककीमसनदसेज़ियादा
आँखेंतोलगीरहतीहैंदरवाज़ेकीजानिब
मिलतीहैख़ुशीअपनीहीआमदसेज़ियादा
क्याजानिएक्याबातहैइकउम्रसे'साजिद'
वीरानहैटूटेहुएमरक़दसेज़ियादा
  - Iqbal Sajid
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